पीएम शहबाज का कहना है कि जिन आरोपों की जांच अब एफआईए कर रही है, पहले राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) उनकी जांच कर चुका है। उसमें उनके या बेटे के खिलाफ कुछ भी साबित नहीं हुआ था। सुप्रीम कोर्ट में एनएबी कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाई थी।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके बेटे और पंजाब के मुख्यमंत्री हमजा शहबाज को मनी लांड्रिंग के मामले में अदालत ने अग्रिम जमानत दी है। गौरतलब है कि संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) इस मामले में जांच कर रही है। पिछले सप्ताह जांच एजेंसी ने अरबों रुपये के मनी-लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के लिए दोनों की गिरफ्तारी की मांग की गई थी।
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अदालत के एक अधिकारी ने बताया, पिछले सप्ताह एफआईए ने 14 अरब रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अंतरिम रिपोर्ट पेश कर अदालत से मांग की थी कि जांच के लिए उसे प्रधानमंत्री और अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार करने की जरूरत है। एजेंसी ने तर्क दिया था कि दोनों जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और उन्हें हिरासत में लेकर ही पूछताछ की जा सकती है। शनिवार की सुनवाई के दौरान एजेंसी अपने रुख से पूरी तरह पलट गई तो अदालत ने पीएम, उनके बेटे और अन्य संदिग्धों को अग्रिम जमानत दे दी। दोनों को सात दिन के भीतर 10 लाख रुपये अदालत में जमा कराने होंगे।
पीएम शहबाज का कहना है कि जिन आरोपों की जांच अब एफआईए कर रही है, पहले राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) उनकी जांच कर चुका है। उसमें उनके या बेटे के खिलाफ कुछ भी साबित नहीं हुआ था। सुप्रीम कोर्ट में एनएबी कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाई थी। उन्होंने साथ ही कहा, जब वे एनएबी की हिरासत में थे तो एफआईए ने दो बार उनसे संपर्क किया था। बाद में एनएबी ने सभी मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की। इसमें मुझे बरी कर दिया गया।
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बेटे की चीनी मिल में साझेदारी से किया इनकार
जज इजाज हसन अवान ने प्रधानमंत्री से पूछा कि बेटे हमजा की चीनी मिल में क्या उनकी हिस्सेदारी है तो शहबाज ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, चीनी मिल से मेरा कुछ लेना-देना नहीं है। एफआईए गलत तथ्य प्रस्तुत कर रही है। अदालत में सुनवाई के दौरान एक बार तो पीएम शहबाज भावुक हो गए। उन्होंने कहा, इंसाफ का दिन आएगा, लेकिन एफआईए मेरे खिलाफ एक रुपये का भी भ्रष्टाचार साबित नहीं कर पाएगी।
पीएम का बेटा सुलेमान है ब्रिटेन फरार
एफआईए ने शहबाज, उनके बेटों हमजा और सुलेमान के खिलाफ नवंबर-2020 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून के तहत केस दर्ज किया था। अदालत ने सुलेमान के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया तो वह ब्रिटेन फरार हो गया। एफआईए की जांच में 28 बेनामी खातों का पता चला था। आरोप था कि यह शहबाज के परिवार से संबंधित हैं। इन्हीं खातों के माध्यम से 2008 से 2018 के दौरान 1400 करोड़ रुपये विदेश भेजे गए हैं। धन का पता लगाने के लिए एफआईए ने 17,000 लेन-देन की जांच की थी।