पाकिस्तान में कट्टरपंथी धार्मिक पार्टियों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि हाल ही में उत्तर-पश्चिमी शहर पेशावर में हुए उप चुनाव में पाकिस्तान के सख्त ईशनिंदा कानूनों के समर्थन करने वाली तहरीक-ए-लबाइक पार्टी ने चुनाव में 7.6 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं। इस पार्टी को जीत तो हासिल नहीं हुई लेकिन लोगों ने भारी मत देकर इस पार्टी को समर्थन मिला है।
पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर इमरान खान के नेतृत्व वाली विपक्षी तहरीक-ए-इंसाफ ने इस उप चुनाव में जीत हासिल की है। यह उप-चुनाव उस जगह से महज 60 किलोमीटर की दूरी पर हुआ जहां 6 महीने पहले मार्शल खान की हत्या कर दी गई थी।
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इस पार्टी का नारा है 'ईशनिंदा करने वालों को मौत दो'। पाकिस्तान में बीते कुछ समय मे ईशनिंदा कानून के नाम पर कई लोगों का कत्ल किया गया है। ईशनिंदा पाकिस्तान में एक अहम मुद्दा बन गया है क्योंकि इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों के साथ बहुत कम ही लोग खड़े नजर आते हैं।
क्या है ईशनिंदा कानून
ईशनिंदा कानून में मजहबी भावनाएं भड़काने, इबादतगाहों को अपवित्र करने, पैगंबर हजरत मोहम्मद की आलोचना और कुरान शरीफ को नुकसान पहुंचाने जैसे अपराधों के लिए सजा का प्रावधान है। इस कानून में कुरान को क्षति पहुंचाने वाले के लिए उम्रकैद, जबकि पैगंबर की निंदा करने वाले के लिए मौत की सजा का प्रावधान है।