पाकिस्तान के चुनावों में नवाज़ शरीफ़ की पार्टी को मिली जीत का सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से स्वागत हो रहा है।
हालांकि पाकिस्तान से आ रही टिप्पणियों में से कुछ में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं लेकिन ज़्यादातर में चुनाव नतीजों का स्वागत किया गया है।
भारत में आई टिप्पणियों में नवाज़ शरीफ़ की जीत को सकारात्मक रुप से देखा जा रहा है।
लोकतंत्र की मज़बूती
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कार्यवाहक मुख्यमंत्री नजम सेठी ने अपनी टिप्पणी में कहा है,“पाकिस्तान के इतिहास के सबसे शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए पंजाब को बधाई।”@najamsethi
लेकिन वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार शाहिद मसूद ने इन परिणामों पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने ट्विटर पर कहा है,“अक्षम चुनाव आयोग की देखरेख में साल 2013 के चुनाव पाकिस्तानी इतिहास में सबसे ज़्यादा धांधली वाले चुनाव साबित हुए।”@Shahidmasooddr
तलत असलम पाकिस्तानी पत्रकार हैं। उन्होंने भी इन नतीजों पर ख़ुशी ज़ाहिर की है. ट्विटर पर उन्होंने कहा है,“इस बुरे वक्त में खुश होने की एक वजह: जनता की चुनी हुई सरकार अपनी ही चुनी हुई एक पुरानी सरकार से सत्ता संभाल रही है,जिसने अपना कार्यकाल पूरा किया है।”@titojourno
पाकिस्तानी लेखक-विचारक मार्वी सरमद ने अपने ट्वीट में लिखा है,“विचारधाराओं में मतभेद की बात अलग रखते हुए,चुनाव में भाग लेने वाली सभी पार्टियों को शुभकामनाएं. आपमें लोकतंत्र की जड़ बसती है।”@marvisirmed
नवाज़ शरीफ़ की बेटी मरियम नवाज़ शरीफ़ ने अपने ट्वीट में युवाओं को संबोधित किया है,“समझदार युवाओं ने पीएमएल-एन का साथ दिया जिसने पहले भी अच्छा काम किया था और आगे भी इन्शा अल्लाह अच्छा काम करती रहेगी. शाबाश! आइए मिलकर एक रोशन पाकिस्तान बनाए।”@MariyamNSharif
पाकिस्तानी पत्रकार उमर वराइच के ट्विटर संदेश में इन परिणामों के बारे में लिखा है,“जिन्हें लगता है पाकिस्तान रूढ़ीवादी देश है वे जान लें - शाह महमूद,गिलानी,फ़ैसल सालेह हयात और आबिद इमाम जैसे लोग पराजित हो चुके हैं।”@OmarWaraich
भारत से भी स्वागत
जम्मू और कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ने ट्विटर संदेश में नवाज़ शरीफ़ से उम्मीद ज़ाहिर की है,“मुझे उम्मीद है कि पाकिस्तान हुए हिंसक चुनाव को देखते हुए लोगों को यक़ीन हो गया होगा कि चरमपंथी अच्छे या बुरे नहीं होते,हर तरह का चरमपंथ बुरा होता है। नवाज़ शरीफ़ को बधाई, मुझे उम्मीद है कि वो अपने वादों पर खरे उतरेंगे और साल 1999 से बंद पड़ी शांति प्रक्रिया रफ्तार पकड़ पाएगी।”@abdullah_omar
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कई टिप्पणियाँ की हैं. उनमें से एक में वे कहते हैं,“शरीफ की जीत से सबक-राजनीति में किसी को ख़त्म हुआ न मानें - जेल,निर्वासन,अलग-थलग पड़ना,राजनीति तो सत्ता में रहने का खेल है।”@sardesairajdeep
अपने दूसरे संदेश में उन्होंने कहा है,“पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की हार से सबक - डायनेस्टी और सदभावना, भ्रष्टाचार और बुरे शासन के कारण हुई हार।”
भारत के वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला ने इमरान ख़ान की पार्टी की हार पर सवाल उठाया है,“क्या इमरान ख़ान पाकिस्तान का चुनाव इसलिए हार गए क्योंकि उन्होंने भारत के बड़े मत निर्धारकों का समर्थन हासिल कर लिया था?”@PrabhuChawla
अमर उजाला के एक पाठक पवन शर्मा निर्मल ने मुशर्रफ के जेल में होने और नवाज़ शरीफ़ की जीत पर अमर उजाला के फ़ेसबुक पेज पर लिखा है,“समय बड़ा बलवान,किसी वक्त इस मुशर्रफ उस नवाज को पाकिस्तान छोड़ने पर मजबूर किया था।”
अमर उजाला के एक और पाठक आदिल शेख़ ने फ़ेसबुक पर लिखा है,“पहले भी नवाज़ शरीफ़ की सरकार दो बार आ चुकी है,कारगिल के टाइम में भी यही पीएम थे...इमरान से उम्मीद की जा सकती थी।”
अमेरिकी प्रतिक्रिया
पूर्व अमरीकी विदेश उपमंत्री स्ट्रॉब टैलबॉट ने ट्विटर पर दिए गए अपने संदेश में पुराने दिनों को याद किया है।
वे लिखते हैं,“नवाज़ शरीफ़ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने की तैयारी कर रहे है, इस मौके पर याद आता है कि साल 1999 में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने मुशर्रफ़ से बात करके नवाज़ शरीफ की जान बचाई थी. शरीफ की फ़ांसी की सज़ा रद्द कर दी गई थी।”@strobetalbott
“कारगिल संकट के वक्त उन्हें क्लिंटन ने ही बताया था पाकिस्तानी सेना परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। क्लिंटन की ही मध्यस्थता के बाद कारगिल संकट ख़त्म हुआ था।”@strobetalbott