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रेहाम ने खोले, इमरान से शादी टूटने के राज

Sat, 21 Nov 2015 04:26 PM IST
शबनम महमूद/बीबीसी संवाददाता
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पाकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर और अब राजनेता इमरान खान की पूर्व पत्नी रेहाम खान का कहना है कि जिस तरह से उनके तलाक को लेकर मीडिया में बातें हो रही हैं उससे दुनिया में देश की बदनामी हो रही है।
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बीबीसी से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी के घर में क्या हो रहा है इसमें किसी को दिलचस्पी नहीं लेनी चाहिए। "हमारा मजहब भी कहता है कि ऐसे मामलों में केवल अफसोस जताना चाहिए।"

रेहाम ने कहा, "तलाक के बाद अब यह अध्याय समाप्त हो गया है और इस पर अब बात नहीं होनी चाहिए। मीडिया में जिस तरह की बातें हो रही हैं उससे देश की छवि दुनिया में खराब हो रही है।" तलाक की वजह पूछने पर उन्होंने कहा, "हमारी शादी इसलिए टूटी क्योंकि हम लोगों की आपस में बन नहीं पाई। लेकिन मुझ पर जो आरोप लगाए गए वे अफसोसनाक हैं।"
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रेहाम कहती हैं, "पाकिस्तान में अगर कोई औरत तलाक के बारे में सोचती भी है तो उसे बहुत डराया धमकाया जाता है। उसके बारे में तरह-तरह की बातें की जाती हैं। यह अच्छी बात नहीं है। हमें तलाक का हक है।"

उन्होंने कहा कि जो तलाक की प्रक्रिया से गुजर रहा होता है उसके लिए बड़ी तकलीफदेह स्थिति होती है। ऐसी स्थिति में किसी तरह के आरोप से परहेज करना चाहिए।
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'मेरे राजनीति में आने से इमरान को नहीं था एतराज'

इमरान से शादी के बारे में रेहाम ने कहा, "मैंने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष के साथ शादी नहीं की, किसी सेलिब्रिटी या क्रिकेट आइकन के साथ शादी नहीं की। मैंने एक ऐसे इंसान से शादी की जिनकी जिंदगी मेरी तरह ही गुजरी है। उनका तलाक हो चुका था। बच्चों की जुदाई थी। मुझे लगा कि वह अकेले हैं और मैं उनकी मदद कर सकती हूं।"

उन्होंने कहा, "जब पाकिस्तान के बारे में हमारी बातचीत हुई तो मुझे लगा कि हमारी दिशा एक है। मैंने उनसे कहा कि आप इतनी बड़ी हस्ती हैं मैं आपसे शादी कैसे कर सकती हूं। इस पर वह हंसे और उन्होंने कहा कि हर काम तो मैं पब्लिक के लिए नहीं कर सकता हूं।"

यह पूछने पर कि क्या वह राजनीति में आना चाहती थीं और इमरान के मना करने पर उन्होंने तलाक का फैसला किया, रेहाम ने कहा, "कोई भी पाकिस्तानी औरत ऐसी किसी बात पर तलाक का फैसला नहीं कर सकती। मैंने खान साहब को राजनीति में इसलिए सपोर्ट किया क्योंकि वह मेरे परिवार का हिस्सा थे। अगर वह किसी और पेशे में होते तो भी मैं उनकी मदद करती।"

उन्होंने कहा, "मेरे सियासत में आने पर खान साहब को कोई आपत्ति नहीं थी। लेकिन मैं सियासत में नहीं आ सकती थी क्योंकि मेरी दोहरी नागरिकता है। मेरी सियासत में कोई दिलचस्पी नहीं थी मैं सिर्फ खान साहब को कामयाब देखना चाहती थी।"

रेहाम कहती हैं, "सियासत से पाकिस्तान के मसले हल नहीं होंगे। हमें अपनी सोच बदलनी पड़ेगी। मैं चाहती हूं कि खान साहब के इर्द-गिर्द अच्छे लोग हों जो पाकिस्तान को सही रास्ते पर आगे ले जाएं। जब तक देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं होंगे, तब तक अच्छे उम्मीदवार जीतकर नहीं आएंगे।"
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