पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर विचार व्यक्त करने वाले कई लोगों का मानना है कि जनरल राहील शरीफ 'एक मसीहा हैं जो देश को आतंकवाद, भ्रष्टाचार और सामाजिक बुराइयों से बचा रहे हैं।'
जनरल राहील शरीफ न तो प्रधानमंत्री हैं और न ही राष्ट्रपति, लेकिन पाकिस्तान में बेहद लोकप्रिय हैं। यहां तक कि कई नेता भी स्थानीय चुनावों में जनरल राहील की फोटो का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कई बैनरों में जनरल की तारीफ के पुल
कराची में कानून और व्यवस्था को ठीक करने का श्रेय जनरल राहील को दिया जाता है। पाकिस्तान में उनके नाम से कई बैनर भी दिखाई देते हैं।
ट्विटर और फेसबुक पर उनका शुक्रिया अदा करने के लिए खास पेज बनाया गया है। सबसे पहले यह पेज 16 दिसंबर 2014 को पेशावर में सेना के स्कूल पर हमले के वक्त देखा गया।
इस हमले में 150 लोग मारे गए थे जिसमें ज्यादातर स्कूली बच्चे थे। इस हमले के जिम्मेदार चरमपंथियों को पकड़ने और सजा दिलाने में सेना प्रमुख की बड़ी भूमिका मानी जाती है।
सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति ममनून हुसैन, प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और जनरल राहील शरीफ की एक उपहासपूर्ण तस्वीर वायरल हो रही है।
'सेना प्रमुख पाकिस्तान की चिंता कर रहे हैं'
इस फोटो में दिखाया गया है कि राष्ट्रपति नाश्ते के बारे में सोच रहे हैं, प्रधानमंत्री व्यापार के बारे में सोच रहे हैं, जबकि सेना प्रमुख पाकिस्तान की चिंता कर रहे हैं।
हाल ही में पाकिस्तान की द हेराल्ड पत्रिका में एक कवर स्टोरी छपी थी, जिसमें जनरल शरीफ के व्यक्तित्व के बारे में चर्चा की गई थी।
इसमें पत्रकार उमर फारूक सवाल उठाते हैं क्या ऐसा अभियान जान-बूझकर चलाया जा रहा है?
उन्होंने सेना के जनसंपर्क विभाग (आईएसपीआर) के एक पूर्व अधिकारी ब्रिगेडियर एआर सिद्दीकी के हवाले से बताया है कि ऐसी छवि कई बार आधिकारिक निर्देशों पर बनाई जाती है।
जनरल को लेकर मजाक भी
हालांकि आईएसपीआर इस बात से इनकार करता है। लेकिन जहां बहुत ज्यादा सराहना शुरू हो जाए, वहां मजाक भी खूब उड़ने लगता है।
एक टीवी चैनल के प्रोड्यूसर ने ट्विटर पर लिखा, "जब मैं अपने काम के लिए जा रहा था तो सारी ट्रैफिक लाइट्स हरी थीं #ThankYouRaheelSharif."
ट्विटर पर @DrMajorlyPhD नाम के एक एकाउंट ने लिखा, "मैंने मैड मैक्स फुरी रोड मूवी देखी, इसकी कहानी अजीब है लेकिन फिल्म शानदार है #ThankYouRaheelSharif."
मलिक मोहम्मद यूसुफ खुद को नवाज शरीफ की पार्टी का एक निराश कार्यकर्ता बताते हैं। उनका कहना है कि 'जनरल शरीफ अगले साल रिटायर होने वाले हैं, लेकिन आतंकवाद से लड़ने के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा देना चाहिए.' उनकी यह बात भी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है।
जनरल को लेकर लोकतांत्रिक संस्थाएं चिंतित
ऐसा उदाहरण पाकिस्तान में पहले भी देखा गया है। इससे पहले जनरल अशफाक परवेज कयानी का कार्यकाल तो सोशल मीडिया पर किसी अभियान के बगैर ही बढ़ाया गया था।
लेकिन पाकिस्तान में लोकतंत्र को बढ़ावा देने वाले संगठन 'पिल्दात थिंक टैंक' के अध्यक्ष अहमद बिलाल कहते हैं कि ऐसी बातों से पाकिस्तान में लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर होंगी।
उनका दावा है कि 'पिल्दात' के सर्वेक्षण के अनुसार पाकिस्तान के लोग सेना का समर्थन करने के बावज़ूद भी अब सैनिक तानाशाही नहीं चाहते हैं।
अहमद बिलाल का मानना है कि पाकिस्तान के सैनिक कमांडर बहुत लोकप्रिय हैं, लेकिन पाकिस्तान के राजनीतिक नेताओं के विकल्प के रूप में नहीं।