पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ को विदेश जाने की इजाज़त देने पर वहां के मीडिया ने सरकार की ख़ूब खिंचाई की है। मीडिया के मुताबिक़ राजद्रोह के आरोपी मुशर्रफ़ को विदेश जाने की अनुमति देना 'क्रूर मज़ाक' और 'संविधान का मखौल उड़ाना' है।
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सुप्रीम कोर्ट ने 16 मार्च को दिए एक फ़ैसले में सिंध हाईकोर्ट का फ़ैसला बरक़रार रखा है। सिंध हाईकोर्ट ने विदेश जाने से रोके जाने वाले लोगों की सूची से मुशर्रफ़ का नाम निकालने और उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की इजाज़त देने को कहा था।
परवेज़ मुशर्रफ़ चुनाव लड़ने के मक़सद से पाकिस्तान लौटे तो 5 मार्च 2015 को उनके देश छोड़ने पर रोक लगा दी गई थी। 3 नवंबर 2007 को देश पर इमर्जेंसी थोपने की वजह से उन पर राजद्रोह का मुक़दमा चल रहा है, उन्हें 31 मार्च को अदालत में अपना बयान दर्ज कराना था।
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पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि मुशर्रफ़ को बाहर जाने की इजाज़त देना "देश के क़ानून को तार-तार करने जैसा" है। पाकिस्तानी अख़बारों ने उनकी बात को दुहराया है, सोशल मीडिया पर भी यह बात छाई रही।
पाकिस्तान के अखबारों में छाया रहा मुद्दा
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- फोटो : pervez
अंग्रेज़ी दैनिक 'पाकिस्तान टुडे' ने 18 मार्च को अपने संपादकीय में लिखा, "मुशर्रफ़ की गारंटी उस संविधान से ज़्यादा पवित्र तो नहीं ही है, जिसकी शपथ लेकर उन्होंने धज्जियां उड़ाई हैं, यह एक और उदाहरण है कि किस तरह ख़ास किस्म के लोगों के साथ आम जनता से अलग व्यवहार किया जाता है।"
राष्ट्रवादी अंग्रेज़ी अख़बार 'द नेशन' लिखता है, "कई लोगों को इस पर संदेह है कि मुशर्रफ़ एक बार देश से बाहर जाने के बाद लौटकर आएंगे, पर उनकी ग़ैर मौजूदगी शायद देश के लिए अच्छी ही है। उन पर चल रहा मुक़दमा नवाज़ शरीफ़ सरकार और सेना के बीच झगड़े का सबब बना हुआ था। सेना को मलाल था कि उनके पूर्व प्रमुख पर मुक़दमा चलाया जा रहा है।"
इसी तरह पीपीपी नेता मुहम्मद ज़ुबैर ने उर्दू के 'शमा टीवी' पर एक बहस के दौरान कहा, "सेना-नागरिक सरकार के बीच टकराव टालने का यह बुद्धिमानी भरा फ़ैसला था।"
अंग्रेज़ी अख़बार 'द न्यूज़' में अंसार अब्बासी ने लिखा, "नवाज़ शरीफ़ ने जनरल मुशर्रफ़ के आगे घुटने टेक दिए हैं. उन्होंने संविधान का मखौल उड़ाया है।"
जिहाद समर्थक उर्दू दैनिक 'औसाफ़' अपने संपादकीय में लिखता है, "हालांकि मुशर्रफ़ पूर्व सेना प्रमुख और पूर्व राष्ट्रपति हैं, पर इस तरह एक अभियुक्त को दी गई रियायत क़ानून के इक़बाल को कमज़ोर करेगी।"
इस्लामाबाद से छपने वाले अख़बार पाकिस्तान ने लिखा, "अब जबकि मुशर्रफ़ को विदेश जाने की इजाज़त दे दी गई है, वे यह आरोप नहीं लगा सकते कि सरकार बदला ले रही है।"
ट्विटर पर भी यह मुद्दा छाया रहा। #PervezMusharraf ख़ूब चला और लोगों ने पूर्व राष्ट्रपति पर काफ़ी तंज़ किए, उनका ख़ूब मज़ाक उड़ाया। सिराज जावेद युसुफ़ज़ई (@MShirazjaved) ने ट्वीट किया, "मुशर्रफ़ दुनिया के पहले कमांडो हैं, जो अदालत का सम्मन मिलते ही किसी अस्पताल में जा छिपते हैं।"
इसी तरह शफ़ा (@FarhanShahneela) ने लिखा, "माई लॉर्ड! यदि आप सबसे ताक़तवर लोगों में से हैं तो सारे लोग आपकी ख़िदमत में हाज़िर हैं।" लेकिन कुछ लोगों ने परवेज़ मुशर्रफ़ का बचाव भी किया, वकास (@therealVicCrack) ने लिखा, "परवेज़ मुशर्रफ़ अकेले इंसान हैं जो पाकिस्तान के लिए अच्छे हैं।"
इसी तरह एम तुफ़ैल मलिक (@mTufailMalik) ने ट्वीट किया, "परवेज़ मुशर्रफ़ दूसरे राजनेताओं से अधिक लोकतांत्रिक शासक थे।"