पाकिस्तान सांसदों ने उत्तर पश्चिम राज्य खैबर-पख्तुनख्वा के साथ अफगानिस्तान सीमा से सटे अशांत कबायली क्षेत्र के विलय के लिए मतदान किया। इसके एक दिन पहले इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को नेशनल एसेंबली से ध्वनिमत से पारित कर दिया था। विपक्ष और गठबंधन सहयोगियों के बीच मतभेदों के वजह से महीनों से लंबित 31वें संविधान संशोधन के प्रस्ताव को कानून मंत्री बशीर विर्क ने 104 सदस्यीय संसद में रखा गया।
इस विधेयक के तहत संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्र (एफएटीए) का खैबर-पख्तुनख्वा प्रांत के साथ विलय होना है। इस विधेयक को बृहस्पतिवार को नेशनल एसेंबली में 229-1 वोट से पारित कर दिया गया। इसके साथ ही 150 साल पुराने ब्रिटिश युग व्यवस्था का खात्मा हो जाएगा। विधेयक को पास होने के लिए 69 वोट की दरकार थी लेकिन 71 सांसदों ने इस विधेयक का समर्थन किया जबकि सिर्फ 5 सदस्य ही इसके विरोध में थे।
पख्तुनख्वा मिल्ली अवामी लीग (पीकेएमएपी) ने इस विधेयक का विरोध किया। एक अन्य पार्टी जमात उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) ने इस विधेयक का विरोध किया। मतदान के दौरान जेयूआई-एफ के सांसद वाकआउट कर गए। अब इस विधेयक को खैबर-पख्तुनख्वा प्रांत के एसेंबली में पेश किया जाएगा ताकि प्रांतीय क्षेत्र में बदलाव हो सके।