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जेल से रिहा हुआ मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड लखवी

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भारत के तमाम ऐतराजों के बावजूद खूंखार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोयबा का ऑपरेशन कमांडर और 2008 के मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड जकी-उर रहमान लखवी शुक्रवार दोपहर को जेल से बाहर आ गया। इस दौरान जेल के बाहर आतंकी संगठन जमात-उद दावा के तमाम समर्थक भी मौजूद थे।
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बृहस्पतिवार को लाहौर हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से उसके खिलाफ पेश किए सबूतों को नाकाफी बताते हुए उसकी हिरासत को स्थगित कर दिया था। साथ ही उसे रिहा करने का भी आदेश दिया था।

लखवी पिछले छह साल से रावलपिंडी की अदीलाबाद जेल में बंद था। लाहौर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की ओर से सिक्योरिटी एक्ट के तहत जेल में रखने के आदेश को रद्द करते हुए कहा था कि सरकार यह बताने में नाकाम रही है कि लखवी को जेल में रखा जाना क्यों जरूरी है और उसके बाहर रहने से क्या खतरा हो सकता है।
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भारत ने हाईकोर्ट के इस फैसले को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा था कि लखवी को जेल में रखना पाकिस्तान की जिम्मेदारी है। भारत ने कहा था कि सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा न मिले, इसके लिए लखवी का जेल में रहना बेहद जरूरी है।

लखवी के वकील रजा रिजवान अब्बासी ने कहा कि सरकार ने उसके मुवक्किल को रिहा करने का फैसला किया है क्योंकि उसे जेल में रखने का कोई और विकल्प नहीं बचा है। अब न तो सरकार और न ही अदीला जेल प्रशासन अदालत के फैसले से परे जाकर लखवी को हिरासत में रख सकते हैं।

लखवी और छह अन्य आतंकियों पर मुंबई हमलों को अंजाम देने का आरोप है। जिसमें 166 लोग मारे गए थे, जबकि 300 से अधिक जख्मी हो गए थे। खूंखार आतंकी लखवी लश्कर-ए-तोयबा का संस्थापक और जमात-उद दावा प्रमुख हाफिज सईद का करीबी है। जिसे दिसंबर 2008 में गिरफ्तार किया था।

25 नवंबर, 2009 में उसके खिलाफ 26/11 आतंकी हमले को लेकर केस की शुरुआत हुई थी। गौरतलब है कि 2009 से ही यह मामला पाक सरकार की हीलाहवाली की वजह से आज भी लंबित है और इस पर कोई फैसला नहीं आ सका है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताई नाराजगी
लखवी की रिहाई पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के लिए फ्रांस ने जिस तरह से संवेदना या पीड़ा जताई है उससे यह साफ नजर आता है कि ऐसे मामलों में हमारे विचार एक जैसे ही हैं। भारत और फ्रांस आतंकवाद के मामले में एक जैसा नजरिया अपनाते हैं। जब भी कभी दोनों देशों पर पर आतंकी हमला हुआ तो दोनों ही देशों ने ऐसे समय में एक दूसरे का सहयोग किया और साथ खडे़ नजर आए।

दुनिया के लिए अच्छी नहीं लखवी की रिहाई: फ्रांस
लखवी की रिहाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना शुरू हो गई है। फ्रांस ने भी भारत के सुर में सुर मिलाते हुए कहा है कि लखवी की रिहाई न तो भारत के लिए ठीक है और न ही दुनिया के लिए।

लखवी की रिहाई का मुद्दा उस समय उठा, जब यहां के दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को फ्रांसीसी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नेशनल एसेंबली के प्रेसीडेंट क्लाउड बार्तलोने से मुलाकात की।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि फ्रांसीसी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। फ्रांसीसी पक्ष ने इस मामले में भारत के साथ एकजुटता प्रदर्शित की।

26/11 के पीड़ितों का अपमान है: भारत
भारत ने लखवी को रिहाई को मुंबई हमले के पीड़ितों का अपमान बताया है। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान के दोहरे मानदंड की ओर ध्यान दिलाया है। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वैश्विक समुदाय को पाक के आतंकवाद के प्रति दोहरे रवैये अपनाने पर ध्यान देना चाहिए।

दुर्भाग्यपूर्ण है पाक का यह कदम: राजनाथ
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत पाक के साथ बातचीत करना चाहता है, लेकिन लखवी की रिहाई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक है। ऐसे कदमों से दोनों देशों के आपसी रिश्तों पर असर पड़ता है।
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