पाकिस्तान का दूसरा नाम आतंक का पनाहगाह है। यही वजह है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता में भारी कटौती कर दी है जिसकी वजह से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। यही नहीं पाकिस्तान को एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) ने ब्लैकलिस्ट भी रख दिया है जिसकी वजह से पाक को कई तरह की आर्थिक और सामाजिक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान पर शिकंजा कसने के लिए फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) ने उसे ग्रे लिस्ट में डाला है। पाकिस्तान पर आरोप है कि वह आतंकवादियों की आर्थिक मदद को रोक पाने में असफल रहा है।
आतंक का सबसे बड़ा पनाहगाह कहे जाने वाला पाकिस्तान बीच-बीच में आतंकियों पर कार्रवाई की भी बात करता है लेकिन तब पाक सरकार की पोल खुल जाती है जब प्रतिबंधित आतंकी सरगना की वहां की राजनीति में पैठ दिखती है और वह राजनीतिक रूप से खूब सक्रिय नजर आता है। यही नहीं आतंकी संगठन की राजनीति में सक्रियता पर लगाम लगाने के लिए पाकिस्तान सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ता है। लेकिन पिछले दिनों पाकिस्तानी अखबार डॉन के सर्वे ने पाकिस्तान सरकार और आतंकी सांठगांठ की पोल कोल कर दी है।
आतंकियों की पनाहगाह बने पाकिस्तान
पाकिस्तान में सरकार और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सरंक्षण में आतंकी किस तरह से अपनी कार्रवाई को अंजाम देते हैं यह किसी से छिपा नहीं है। पाकिस्तान खुद भी आतंक से बुरी तरह प्रभावित है लेकिन फिर भी वह इसपर लगाम लगाने में पूरी तरह से नाकामयाब रहा है।
पाकिस्तान ने वैश्विक दबाव के बाद करीब 64 आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है लेकिन वह प्रतिबंध सिर्फ कागजों तक पर निर्भर है क्योंकि ये संगठन बहुत तेजी से सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों में अपनी पैठ बना रहे हैं। और खुलेआम बना रहे हैं। पाकिस्तान में करीब ढाई करोड़ फेसबुक यूजर हैं और इनसे ये संगठन सीधेतौर पर जुड़कर धर्म और आतंक का पाठ पढ़ा रहे हैं। मजेदार बात यह है कि इनके फॉलोवर भी तेजी से बढ़ रहे हैं और उनके पेज भी लगातार बढ़ रहे हैं।
आतंकी
आतंकी संगठन के 200 पेज और समूह हैं लगातार बढ़ रहे फॉलोअर्स
मजेदार बात यह है कि इन संगठनों को सोशल मीडिया पर बहुत आसानी से खोजा जा सकता है। यहां तक की फेसबुक पर तो लगभग सभी प्रतिबंधित संगठनों को संक्षिप्त नाम या स्पेलिंग डाल कर ही इनकी उपस्थिति मिल जाती है। बातें तब चौंकाती है जब इन संगठनों के पेज, समूह और इंडीविजुयल यूजर प्रोफाइल्स को बड़ी संख्या में वहां की जनता पसंद भी कर रही है।
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक पर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के सैकड़ों पेज और समूह मौजूद हैं। सोशल मीडिया पर अहले सुन्नत वल जमात (एएसडब्ल्यूजे) सबसे ज्यादा 200 पेज और ग्रुप के साथ मौजूद है। जीय सिंध मुत्तहिदा महज (जेएसएमएम) 160 पेज, सिपाह-ए-सहाबा (एसएसपी) 148 और बलूचिस्तान स्टुडेंट्स आर्गेनाइजेशन आजाद (बीएसओ-ए) 54 और सिपाह-ए-मुहम्मद 45 पेज के साथ सक्रिय है।
आतंकी संगठन कर रहे फेसबुक का जमकर इस्तेमाल
पाकिस्तान आतंकी संगठनों को अपनी सरजमीं पर ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी बराबर का स्थान देता है। जब शोध के दौरान प्रतिबंधित आतंकी समूह को तलाशने के लिए नाम डाला तो धरधरा के आतंकी संगठनों के पेज खुलकर सामने आ गए। और पता चला कि करीब हर प्रतिबंधित समूह खुलेआम सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा है। आधिकारिक तौर पर सरकार ने करीब 64 संगठनों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।
इनमें से 41 से अधिक सोशल नेटवर्किंग साइट पर धाक जमाए हुए हैं। यही नहीं वह इसके जरिये धड़ल्ले से अपना प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। पाकिस्तान सरकार और पुलिस भले ही इनतक अपनी पहुंच नहीं बना पा रहे हों लेकिन ढाई करोड़ फेसबुक यूजर से यह संगठन महज एक क्लिक ही दूर हैं। फेसबुक पर मौजूद संगठनों का नेटवर्क शिया और सुन्नी समूहों से लेकर अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों और बलूचिस्तान, सिंध प्रांतों के अलगाववादियों तक है। इन संगठनों को सोशल मीडिया पर खोजना काफी आसान है।
मसूद अजहर
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और लश्कर-ए-झांगवी भी हैं फेसबुक पर
फेसबुक पर मुस्तैदी से अपनी धमक जमा रहे संगठनों में लश्कर-ए-झांगवी (एलईजे), तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), तहरीक-ए-तालिबान स्वात (टीटीएस), जमात-उल-अहरार (जेयूए) और 313 ब्रिगेड के अलावा कई बलूच अलगाववादी समूह हैं।
शोध के दौरान पता चला कि चूंकि इन संगठनों के सदस्य अपनी बात आम लोगों तक पहुंचाने केलिए उनकी ही तरह की भाषा का उपयोग कर रहे हैं। ये संगठन आमतौर पर फेसबुक पर अपनी बातें उर्दू या रोमन उर्दू में करते हैं। ऐसा करने से उनकी पहुंच उनलोगों तक आसान हो जाती है जिन्हें वह प्रभावित करना चाहते हैं। यही नहीं कुछ संगठन इपने संदेश सिंधी या बलूची भाषा में भी लिखते हैं।
आतंकी संगठन भारत के खिलाफ उगलते जहर
प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की पैठ कश्मीर तक में है और वह फेसबुक का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। इसके जरिए लगातार भारत के खिलाफ जहर भी उगल रहे हैं। यही नहीं कई पैसे वाले आतंकी संगठनों ने तो अपना मीडिया सेल भी बना रखा है। वे इसकी मदद से प्रेस रिलीज, उकसावे वाले धार्मिक उपदेश, भाषण के ऑडियो और वीडियो वॉल पर अपलोड करते हैं।
आतंकी संगठन बहुत मजे से सोशल मीडिया का फायदा उठा रहे हैं। वह फेसबुक ही नहीं अपने निजी पेज और ग्रुप वेबसाइट्स, ब्लॉग्स और ट्विटर अकाउंट्स के लिंक भी साझा करते हैं। भारत लंबे समय से पाकिस्तान में फल-फूल रहे आतंकी संगठनों के बारे में दुनिया को आगाह करता रहा है, लेकिन पाकिस्तान इन पर कार्यवाही तो दूर बल्कि दरवाजे के पीछे से मदद ही करता रहा है। जिसका खामियाजा पाकिस्तान की आवाम को भुगतना पड़ रहा है।
फेसबुक की आतंकवाद की समस्या
इस शोध के दौरान चौंकाने वाली बात यह है कि फेसबुक किसी भी तरह की अश्लील, आतंकी गतिविधी वाले पेज को हटाए या पूरी तरह से ब्लॉक कर दे। यह फेसबुक की प्राथमिक कार्रवाइयों में से एक है। लेकिन पूरी जानकारी फेसबुक के पास मुस्तैद नहीं होने की वजह से फेसबुक इस तरह कि किसी भी कार्रवाई करने में असक्षम है।