पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में बुधवार को भारत की तरफ से कुलभूषण जाधव को राजनयिक पहुंच की मांग को खारिज कर दिया। पाक का दावा है कि भारत अपने ‘जासूस’ से उसके द्वारा एकत्रित सूचनाओं को प्राप्त करना चाहता है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून न्यूजपेपर की खबर में कहा गया है कि आईसीजे में अपने जवाब में पाकिस्तान ने कहा है कि विएना समझौते में इस तरह की पहुंच का प्रावधान वैध रूप से आए लोगों के लिए होता है न कि जासूस के लिए।
पाकिस्तान ने कहा कि है कि जाधव कोई आम आदमी नहीं है। वह पाकिस्तान में जासूसी के इरादे से घुसा था और यहां गड़बड़ करने वाली गतिविधियां चला रहा था। 47 वर्षीय जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के लिए इस साल अप्रैल में फांसी की सजा सुनाई थी। भारत इस फैसले के बाद मई में आईसीजे में पहुंचा था। भारत की अपील के बाद आईसीजे ने अंतिम फैसला आने तक जाधव की फांसी पर रोक लगा थी।
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सूत्रों के हवाले से न्यूजपेपर कहता है, पाकिस्तान ने कहा है कि भारत ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि जाधव काल्पनिक मुस्लिम नाम वाले पासपोर्ट पर यात्रा कर रहा था। सेवारत कमांडर के काल्पनिक नाम से यात्रा करने पर स्पष्टीकरण के अभाव में यह स्पष्ट निष्कर्ष निकलता है कि वह खुफिया एजेंसी रॉ के लिए काम कर रहा था। राजनयिक पहुंच के जरिये भारत उसके पास उपलब्ध सूचनाओं को हासिल करना चाहता है। पिछले सप्ताह पाकिस्तान ने जाधव की पत्नी और उसकी मां को उससे (जाधव) 25 दिसंबर को मिलने की अनुमति दी थी। इन दोनों के साथ भारतीय उच्चायोग का एक राजनयिक को भी जाने की अनुमति दी गई है।