महिला शिक्षा के लिए तालिबान के खिलाफ अावाज उठाने वाली और नोबेल पुरस्कार विजेता, मलाला युसुफजई छोटी-सी उम्र में करोड़पति बन चुकी है। उन्होंने ये पैसे अपनी जीवनी 'आई एम मलाला' की बिक्री और दुनियाभर में प्रेरणादायक व्यख्यान देकर कमाए हैं।
पाकिस्तान की रहने वाली 18 वर्षीय मलाला को तालिबानियों ने स्कूल नहीं जाने के फरमान का पालन नहीं करने पर सिर में गोली मार दी थी। हालांकि, वह तालिबानियों के इस हमले में बच गई और दुनियाभर में उनकी पहचान बनी। मलाला ने पाकिस्तान की स्वात घाटी में तालिबान शासन के बीच में अपनी जिंदगी के बारे में अपनी जीवनी ‘आई एम मलाला’ में लिखा है।