पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा को डार्क हॉर्स कहा जाता है। बता दें कि पाकिस्तान में नया सेनाध्यक्ष नियुक्त करते समय भारत, चीन और अमेरिका में ध्यान में जरूर रखा जाता है। भारत इसलिए, क्योंकि नया सेना प्रमुख कश्मीर मामले पर क्या विचार रखता है, इसका असर पाकिस्तान की आतंरिक राजनीति तथा विदेश नीति पर पड़ता है।
वहीं चीन से समन्वय बनाए रखने के लिए, सैन्य सहयोग तथा मदद बढ़ाने का काम भी कुछ हद तक सेना प्रमुख के कंधों पर रहता है। अमेरिका से रक्षा तथा आतंकवाद से लड़ने के नाम पर मिलने वाली आर्थिक सहायता में भी सेना प्रमुख का किरदार बेहद अहम है।
पाकिस्तान के लिए भी खतरा माने जाते हैं बाजवा
जनरल कमर जावेद बाजवा की भूमिका डार्क हॉर्स जैसी है, जिस पर सभी की नजर है। दरअसल बाजवा इस समय पाकिस्तानी सेना मुख्यालय जीएचक्यू में जिस पद पर हैं, उसी पद पर पहले राहील शरीफ भी थे। यहां रहते हुए पाकिस्तानी सेना की सबसे बड़ी विंग 10 कॉर्प्स को कंट्रोल किया जाता है, जिसके जिम्मे एलओसी की सुरक्षा है।
दरअसल बाजवा कश्मीर ऑपरेशंस पर बेहद रुचि लेते हैं और कट्टर विचारधारा के हैं। इस वजह से एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सेना प्रमुख का ओहदा उन्हें मिला तो वो खुद अपने मुल्क पाकिस्तान के लिए भी खतरा बन सकते हैं। एलओसी पर अभी चल रहे ऑपरेशंस के पीछे उसका ही दिमाग बताया जा रहा है। बाजवा ने कांगो में यूएन मिशन के दौरान पूर्व भारतीय थलसेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह की डिवीजन में काम किया था।
बाजवा को इसलिए भी डार्क हॉर्स माना जा रहा है क्योंकि उनका संबंध क्वेटा के इंफेन्ट्री स्कूल और बलोच रेजीमेंट से है। इसी रेजीमेंट से पूर्व सेना प्रमुख जनरल याह्या खान, जनरल असलम बेग और जनरल कियानी भी आगे बढ़े थे।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सबसे ज्यादा पाक सेनाध्यक्षों की नियुक्ति की है। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा की नियुक्ति के पहले जनरल राहील शरीफ की नियुक्ति की थी। इससे पहले वो 1991 में जनरल असिफ नवाज जंजुआ, 1993 में जनरल वहीद काकर, 1998 में जरनल परवेज मुशर्रफ, 1999 में जियाउद्दीन बट और 2013 में जनरल राहील शरीफ की नियुक्ति कर चुके हैं।