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पाकिस्तानी नेता इमरान खान बोले- नरेंद्र मोदी ने साबित किया कि भारत का बंटवारा सही था

Mon, 14 Aug 2017 12:29 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
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पाकिस्तान में क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध अपने सबसे बुरे दौर में है। भारत विभाजन के 70 साल होने पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के इस नेता ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने यह साबित कर दिया है कि बंटवारे का फैसला सही था।
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बीबीसी से बातचीत के मुताबिक उन्होंने कहा, मैं यह सोचता हूं कि दोनों देशों के बीच का रिश्ता अपने सबसे बुरे दौर में है। इसकी मुख्य वजह हैं भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। इमरान खान ने कहा, नरेंद्र मोदी की सोच सांप्रदायिक है और उनके संबंध हिंदू चरमपंथियों से हैं। जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब भी उनकी मुस्लिम विरोधी छवि सामने आई थी। 

अटल बिहारी वाजपेयी का कार्यकाल बेहतर
इमरान खान ने कहा, हम लोगों ने यह सोचा था कि जब वो प्रधानमंत्री बनेंगे तो इन सभी चीजों से ऊपर उठ जाएंगे। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी उसी पार्टी से हैं, जिससे नरेंद्र मोदी संबंध रखते हैं।
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जब वाजपेयी प्रधानमंत्री बने थे तो यह चिंता थी कि दोनों देशों के बीच तल्खी बढ़ सकती है, लेकिन उनके कार्यकाल में दोनों देश शांति के करीब थे। खान ने कहा, नरेंद्र मोदी एक विशाल जनादेश के साथ आए हैं। हम लोग और करीब आ सकते थे लेकिन निराशा हाथ लगी है। 
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भारतीय मुसलमान निराश

imran khan
इमरान खान ने कहा कि मोदी ने न सिर्फ पाकिस्तान को बल्कि भारतीय मुसलमानों को भी निराश किया है। उन्होंने भारत की उदारवादी सोच रखने वाले सभी वर्ग को निराश किया है। नरेंद्र मोदी भारत को वहां ले गए हैं, जहां यह सोच होती थी कि भारत में मुसलमानों को समानता का अधिकार नहीं मिलेगा।

भारत-पाकिस्तान बंटवारे को याद करते हुए इमरान ने कहा, जब हम बड़े हो रहे थे, हमारे माता-पिता की पीढ़ी बंटवारे को लेकर यह सोचती थी कि भारत में उन्हें समान अवसर और अधिकार नहीं दिए जाएंगे। नरेंद्र मोदी ने इस सोच को सही साबित कर दिया है। 

नफरत के साथ बड़े हुए लोग
दोनों देशों के बीच बंटवारे को याद करते हुए इमरान खान ने कहा कि मेरी पीढ़ी बंटवारे के बाद जन्मी पहली पीढ़ी थी। जब पाकिस्तान पांच साल का हुआ था, मेरा जन्म हुआ था। मुझे आज भी याद है बंटवारे का दर्द। बंटवारे में लगभग सभी परिवारों ने अपना खोया था।

यह स्थिति सिर्फ पाकिस्तान की नहीं थी, भारत के लोगों ने भी यह दर्द झेला था। उन्होंने आगे बताया, हमलोग भारत के खिलाफ एक नफरत के साथ बड़े हुए थे। भारत के लोग भी इसी नफरत के साथ बड़े हुए। संबंधों में धीरे-धीरे खटास बढ़ती चली गई। 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध का होना, 1971 में पाकिस्तान को बांटकर बंगलादेश का निर्माण, जिसमें भारत का भी हाथ था, इन सभी घटनाओं ने रिश्तों को संभलने नहीं दिया। 

क्रिकेट पर हावी हुई नफरत 
रिश्तों की खटास का क्रिकेट पर क्या असर पड़ा, इस सवाल पर इमरान बताते हैं, मैं पहली बार 1977 में भारत गया था। मैंने यह महसूस किया था दोनों देशों की संस्कृति कितनी मिलती जुलती है। 1978 में पहली बार मैंने भारत के खिलाफ मैच खेला था।

इससे पहले एक्जीबिशन मैच खेला करता था। दर्शक इन मैचों के दौरान खूब उमड़ती थी। उनका हमलोगों पर काफी दवाब होता था। भारत के खिलाफ मैच सिर्फ खेल नहीं होता था। इमरान ने कहा कि 1987 में मेरी दूसरी क्रिकेट यात्रा भारत के लिए थी। अहमदाबाद में टेस्ट मैच चल रहा था, दर्शकों की भीड़ शत्रूतापूर्ण व्यवहार कर रही थी। इससे मैं काफी चकित था। 
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