पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात की जाए तो इस हफ़्ते भी नवाज़ शरीफ़ से जुड़ी ख़बरें ही हर तरफ़ छाई रहीं। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि पाकिस्तान के संविधान को बदलने की ज़रूरत है। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि वो तैयार रहें, जल्द ही वो कोई बड़ी घोषणा करने वाले हैं। नवाज़ शरीफ़ ने ये बातें शनिवार को लाहौर में एक रैली को संबोधित करते हुए कही।
भ्रष्टाचार से जुड़े पनामा लीक्स मामले में सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए उनकी संसद सदस्यता रद्द किए जाने और फिर प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद उन्होंने एक रैली के ज़रिए जनता तक अपना पक्ष रखने का फ़ैसला किया था।
'जनता की अदालत में मेरा मुकदमा'
अपने हज़ारों समर्थकों के साथ उन्होंने बुधवार को राजधानी इस्लामाबाद में स्थित पंजाब हाउस से अपना सफ़र शुरू किया था। कई शहरों से गुज़रते हुए शनिवार को वो अपने पैतृक गांव पंजाब पहुंचे। अख़बार 'जंग' के मुताबिक़ नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि करोड़ों लोगों ने उन्हें चुना था, लेकिन पांच लोगों (सुप्रीम कोर्ट के पांच जज) ने उन्हें रुसवा करके निकाल दिया।
अख़बार लिखता है कि अपने हज़ारों समर्थकों को संबोधित करते हुए नवाज़ शरीफ़ ने कहा, ''उन्होंने मुझे काग़ज़ों में से निकाला, आपके दिल से नहीं निकाल सके. मेरा मुक़दमा आपकी अदालत में है. मुझे यक़ीन है आप मुझे फिर प्रधानमंत्री बना देंगे।''
'कुर्सी गई तो याद आया लोकतंत्र'
नवाज़ शरीफ़ ने आगे कहा, ''जिसकी लाठी उसकी भैंस का निज़ाम अब नहीं चल सकता। इस मुल्क और क़ौम को बदलना होगा। इस निज़ाम के ख़िलाफ़ उठ खड़े होंगे. जनता मेरे संदेश का इंतज़ार करे।'' अख़बार 'दुनिया' ने भी नवाज़ शरीफ़ के बयान को पहली ख़बर बनाते हुए सुर्ख़ी लगाई है, ''अवाम को जगाने निकला हूं, घर नहीं बैठूंगा।'' नवाज़ शरीफ़ पर चुटकी लेते हुए पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने कहा कि कुर्सी जाते ही नवाज़ शरीफ़ को लोकतंत्र की याद आ गई।