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पाकिस्तान के संविधान को बदलने की जरूरत : नवाज़ शरीफ

Sun, 13 Aug 2017 03:28 PM IST
इक़बाल अहमद, बीबीसी
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नवाज शरीफ
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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात की जाए तो इस हफ़्ते भी नवाज़ शरीफ़ से जुड़ी ख़बरें ही हर तरफ़ छाई रहीं। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि पाकिस्तान के संविधान को बदलने की ज़रूरत है। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि वो तैयार रहें, जल्द ही वो कोई बड़ी घोषणा करने वाले हैं। नवाज़ शरीफ़ ने ये बातें शनिवार को लाहौर में एक रैली को संबोधित करते हुए कही।
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भ्रष्टाचार से जुड़े पनामा लीक्स मामले में सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए उनकी संसद सदस्यता रद्द किए जाने और फिर प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद उन्होंने एक रैली के ज़रिए जनता तक अपना पक्ष रखने का फ़ैसला किया था।

'जनता की अदालत में मेरा मुकदमा'
अपने हज़ारों समर्थकों के साथ उन्होंने बुधवार को राजधानी इस्लामाबाद में स्थित पंजाब हाउस से अपना सफ़र शुरू किया था। कई शहरों से गुज़रते हुए शनिवार को वो अपने पैतृक गांव पंजाब पहुंचे। अख़बार 'जंग' के मुताबिक़ नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि करोड़ों लोगों ने उन्हें चुना था, लेकिन पांच लोगों (सुप्रीम कोर्ट के पांच जज) ने उन्हें रुसवा करके निकाल दिया।
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अख़बार लिखता है कि अपने हज़ारों समर्थकों को संबोधित करते हुए नवाज़ शरीफ़ ने कहा, ''उन्होंने मुझे काग़ज़ों में से निकाला, आपके दिल से नहीं निकाल सके. मेरा मुक़दमा आपकी अदालत में है. मुझे यक़ीन है आप मुझे फिर प्रधानमंत्री बना देंगे।''

'कुर्सी गई तो याद आया लोकतंत्र'
नवाज़ शरीफ़ ने आगे कहा, ''जिसकी लाठी उसकी भैंस का निज़ाम अब नहीं चल सकता। इस मुल्क और क़ौम को बदलना होगा। इस निज़ाम के ख़िलाफ़ उठ खड़े होंगे. जनता मेरे संदेश का इंतज़ार करे।'' अख़बार 'दुनिया' ने भी नवाज़ शरीफ़ के बयान को पहली ख़बर बनाते हुए सुर्ख़ी लगाई है, ''अवाम को जगाने निकला हूं, घर नहीं बैठूंगा।'' नवाज़ शरीफ़ पर चुटकी लेते हुए पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने कहा कि कुर्सी जाते ही नवाज़ शरीफ़ को लोकतंत्र की याद आ गई।
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लोकतंत्र को नहीं, शरीफ़ को है खतरा

बिलावल भुट्टो
अख़बार 'एक्सप्रेस' के अनुसार इस्लामाबाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बिलावल भुट्टो ने कहा, ''नवाज़ शरीफ़ जब सत्ता से बाहर होते हैं तो उन्हें लोकतंत्र की याद आ जाती है और जब सत्ता में होते हैं तो सारे लोकतांत्रिक मूल्यों को भूल जाते हैं।'' बिलावल भुट्टो ने आगे कहा, ''इस वक़्त लोकतंत्र को ख़तरा नहीं, नवाज़ शरीफ़ को है। उनसे बातचीत करना तो दूर मियां साहब का फ़ोन भी आया तो नहीं उठाउंगा।'' अख़बार के अनुसार बिलावल भुट्टो ने कहा कि संसद में न्यायपालिका और फौज की कोई भूमिका होनी चाहिए।

अगली बारी फिर ज़रदारी!
अख़बार 'दुनिया' ने भी बिलावल भुट्टो की प्रेसवार्ता को प्रमुखता से छापा है। अख़बार ने बिलावल भुट्टो के एक बयान को सुर्ख़ी लगाते हुए लिखा है, ''कोई माने या न माने मगर अगली बारी फिर ज़रदारी।'' बिलावल भुट्टो ने दावा किया है कि अगले साल होने वाले आम चुनाव में उनकी पार्टी जीत हासिल करेगी और उनके पिता आसिफ़ अली ज़रदारी प्रधानमंत्री बनेंगे।

विपक्षी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ के प्रमुख और पूर्व क्रिकेटर इमरान ख़ान ने नवाज़ शरीफ़ का जवाब देते हुए कहा है कि जनता के बीच उनका 'विक्टिम कार्ड' नहीं चला। अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार इमरान ख़ान ने कहा कि नवाज़ शरीफ़ रैली के ज़रिए ये साबित करना चाहते थे कि उनके ख़िलाफ़ साज़िश रची गई है और वो बेगुनाह हैं, लेकिन लोगों को यक़ीन हो गया है कि नवाज़ शरीफ़ बेगुनाह नहीं हैं।


'अल्पसंख्यक हिंदू की तरक्की ज़रूरी'
इमरान ख़ान ने नवाज़ शरीफ़ पर सीधा हमले करते हुए कहा, ''आप मुलज़िम से मुजरिम बनने जा रहे हैं।''शुक्रवार को पाकिस्तान में अल्पसंख्यक दिवस मनाया गया. पाकिस्तान में हर साल 11 अगस्त को अल्पसंख्यक दिवस मनाया जाता है। इस मौक़े पर अपनी पार्टी के ज़रिए आयोजित एक जलसे को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने ये बातें कहीं।

जलसे के दौरान ही इमरान ख़ान ने पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष राजा असरमाल मंगलानी के उनकी पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार इमरान ख़ान ने कहा कि अल्पसंख्यकों की तरक़्क़ी के बग़ैर पाकिस्तान को एक वेलफ़ेयर स्टेट बनाने का सपना अधूरा रहेगा।
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