धार्मिक पार्टियों ने राष्ट्रीय एवं प्रांतीय विधानसभाओं के लिए पिछले आम चुनाव 2013 में मात्रा कुछ सौ उम्मीदवार खड़े किए थे, वहीं इस चुनाव में उनकी संख्या बढ़कर 1,500 से अधिक हो चुकी है। हालांकि असली समस्या वे नई इस्लामी पार्टियां हैं, जिन पर आतंकियों से संबंध होने के आरोप लगते रहे हैं।
तहरीक-ए-लब्बैक नाम की नई पार्टी का नारा ही ‘ईशनिंदा के आरोपियों को मौत मिले’ है। पंजीकृत होने के बावजूद इस पार्टी को उम्मीदवार खड़े करने पर पाबंदी है। फिर भी 566 उम्मीदवार उतारने वाली यह पार्टी पीएमएल-एन को ईशनिंदा का आरोपी बताती है।
वहीं पीटीआई नेता इमरान खान कहते हैं कि ‘आप मुस्लिम नहीं हो सकते हैं अगर आप यह नहीं मानते कि पैगंबर, हमारे पैगंबर, आखिरी पैगंबर थे। इसलिए इसका समर्थन करना अपने धर्म का समर्थन करना है।’