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पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के सफर की पूरी कहानी

Thu, 31 Aug 2017 05:09 PM IST
amarujala.com- Presented by: ऋतुराज त्रिपाठी
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Benazir Bhutto
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दो बार पाकिस्तान की प्रधानमंत्री रह चुकीं बेनजीर भुट्टो हत्याकांड मामले में कोर्ट ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को भगोड़ा घोषित कर दिया है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक इस मामले में 5 लोगों को बरी कर दिया गया और 2 लोगों को जेल भेज दिया गया। आपको बता दें कि 27 दिसंबर 2007 को रावलपिंडी में एक रैली के दौरान बम धमाके में बेनजीर की हत्या कर दी गई थी। इनकी हत्या के बाद तत्काल मामला दर्ज कर लिया गया था। आइए जानें इनके राजनीतिक और निजी जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य..
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पढ़ें:  पूर्व पाक पीएम बेनजीर भुट्टो हत्याकांड में दो पुलिसवालों को 17 साल की सजा, मुशर्रफ भगोड़ा घोषित

जन्म और परिवार
बेनजीर भुट्टो का जन्म 21 जून 1953 में एक जमींदार परिवार में हुआ था। इनके पिता जुल्फिकार अली भुट्टो थे। बेनजीर ने अपनी प्रारंभिक परीक्षा पाकिस्तान में ही की, इसके बाद अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय और ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड से उच्च शिक्षा हासिल की। 

पढ़ेंं: पाकिस्तानः आम की पेटियों में धमाके से हुई जिया उल हक की मौत?

बेनजीर ने अपने पिता की सियासी विरासत संभालते हुए राजनीति में प्रवेश किया और पहली बार 1988 में पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनी थीं। बेनजीर के पिता को 1975 में प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया था। हत्या के आरोप में उन्हें चार अप्रैल 1979 को फांसी की सजा दे दी गई। 
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बेनजीर भुट्टो का राजनीतिक कार्यकाल

Benazir Bhutto
1988 में पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनने के बाद कुछ विरोधी ताकतों ने इनका कार्यकाल पूरा नहीं होने दिया और नतीजा यह हुआ कि भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद बेनजीर को उनके पद से हटा दिया गया। इसके बाद 1993 में वह एक बार फिर पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनी लेकिन वर्ष 1996 में उन्हें अपने पद से दोबारा हाथ धोना पड़ा। हालांकि बाद में भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें निर्दोष पाया गया। बेनजीर लंदन में अपने निर्वासित जीवन के दौरान ही पीपीपी की नेता बनी थीं।

आतंकियों का निशाना बनीं बेनजीर
पाकिस्तान में लोकतंत्र की बहाली के लिये कई बार आंदोलन चलाने वाली बेनजीर जैसे ही अपना स्वैच्छिक निर्वासन खत्म करके 18 अक्टूबर को पाकिस्तान लौटीं, उसी समय आतंकियों ने उन्हें अपना निशाना बनाना चाहा लेकिन वह बच गईं। 

चुनाव प्रचार के दौरान बेनजीर ने अलकायदा और अन्य आतंकी संगठनों की तीखी आलोचना की थी। जिसके बाद से वह आतंकियों की आंखों में खटकने लगी थीं। इसके कुछ ही दिन बाद 27 दिसंबर 2007 को एक चुनावी रैली के बाद उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। रैली खत्म करने के बाद जैसे ही बेनजीर अपनी कार के सनरूफ से बाहर देखते हुए अपने समर्थकों से विदा दे रही थीं उसी समय उनपर गोली चली। 

जब हुई बेनजीर की शादी
बेनजीर ने अपने राजनीतिक कैरियर के दौरान ही एक सफल व्यापारी आसिफ अली जरदारी से शादी कर ली। लेकिन, कुछ समय बाद ही इनके राजनीतिक कार्यकाल पर संकट के बादल छाने लगे, जिसका नतीजा यह हुआ कि इनके शौहर जरदारी को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाना पड़ा। 
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