पाकिस्तान में पीएम पद छोड़ चुके नवाज शरीफ ने अपने भाई शहबाज शरीफ के साथ ‘राजनीति’ की है। पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पीएमएल-एन के कुछ नेताओं का कहना है कि नवाज शरीफ ने ‘पारिवारिक राजनीति’ की वजह से अपने छोटे भाई शहबाज शरीफ को बड़ी चतुराई से प्रधानमंत्री बनने से वंचित कर दिया, हालांकि इस पद के लिए शाहबाज के नाम का एलान किया गया था।
बीती 28 जुलाई को पनामा पेपर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से अयोग्य ठहराए जाने के बाद नवाज ने एलान किया था कि 45 दिनों के लिए शाहिद खाकान अब्बासी के अंतरिम प्रधानमंत्री रहने के बाद 10 महीने के शेष कार्यकाल के लिए शहबाज प्रधानमंत्री होंगे। परदे के पीछे बातचीत करने पर कुछ पीएमएल-एन नेताओं का कहना है कि शहबाज प्रधानमंत्री बनने का ‘सुनहरा मौका’ चूक गए क्योंकि अब इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि 2018 में पार्टी का चुनाव जीतने पर वह ही प्रधानमंत्री बनेंगे।
पीएमएल-एन के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि शरीफ की बेटी मरियम भ्रष्टाचार के मामले में बरी नहीं होती हैं तो अगले साल होने वाले आम चुनाव में पीएमएल-एन की जीत होने पर शरीफ की बीवी कलसुम प्रधानमंत्री पद की प्रबल दावेदार होंगी। इस नेता ने कहा कि शरीफ को डर है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद शहबाज पार्टी पर कब्जा कर लेंगे और पंजाब की सत्ता अपने बेटे हमजा को सौंप देंगे।
एक अन्य नेता ने कहा, ‘शरीफ ने बेहतरीन पारिवारिक राजनीति की है। पहले अपने भाई को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। इसके बाद अपने करीबी लोगों के साथ मिलकर यह अभियान चलाया कि पंजाब को शहबाज की जरूरत है। उनका पंजाब छोड़ना पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित होगा। इससे पार्टी को 2018 के चुनाव में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।