फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोहिंग्या मुस्लिमों पर मलाला के बयान से बौखलाया चीनी मीडिया

Sat, 09 Sep 2017 08:35 PM IST
बीबीसी, हिंदी
विज्ञापन
Malala Yousafzai
विज्ञापन
नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई ने म्यांमार के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ जारी हिंसा पर 4 सितंबर को एक बयान दिया था।
विज्ञापन


पढ़ें: म्यांमार में हिंसा के कारण बांग्लादेश भागकर आए 2.7 लाख रोहिंग्या मुसलमान

इस बयान में मलाला ने कहा था कि जब भी वह म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों की पीड़ा की खबरें देखती हैं तो वह अंदर से दुखी हो जाती हैं। मलाला ने अपने बयान में आगे लिखा, ''हिंसा थमनी चाहिए।

मैंने म्यांमार के सुरक्षाबलों द्वारा मारे गए छोटे बच्चे की एक तस्वीर देखी। इन बच्चों ने किसी पर हमला नहीं किया था लेकिन इन्हें बेघर कर दिया गया। अगर इनका घर म्यांमार नहीं है तो ये पीढ़ियों से कहां रह रहे थे?''
विज्ञापन

मैं आंग सान सू की के फैसले का इंतजार कर रही हूं

Malala Yousafzai
मलाला ने आगे लिखा है 'रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार नागरिकता दे। दूसरे देशों को भी जिसमें मेरा देश पाकिस्तान भी शामिल है। उसे बांग्लादेश की तरह विस्थापित रोहिंग्या मुस्लिमों को जरूरी चीजें मुहैया करानी चाहिए।''

मलाला ने लिखा है, 'मैं पिछले कई सालों से लगातार इस त्रासद और शर्मनाक व्यवहार की निंदा करती रही हूं। मैं अब भी नोबेल सम्मान से सम्मानित आंग सान सू की की तरफ से कोई ठोस कदम उठाए जाने का इंतजार कर रही हूं। इसके लिए पूरी दुनिया के साथ रोहिंग्या भी इंतजार कर रहे हैं।''

मलाला ने बयान ट्विटर पर जारी किया था। इस बयान की प्रतिक्रिया में उन्हें कई लोगों ने घेरा भी। कई लोगों ने कहा कि मलाला बिना हकीकत जाने इस मसले पर बयान दे रही हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि क्यों नहीं वो पाकिस्तान सरकार से कहती हैं कि रोहिंग्या के लिए दरवाजा खोले।

Aung San Suu Kyi
अब इस मामले में चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी मलाला को घेरा है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, 'मलाला को अपनी फेलो नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची की अलोचना करने से पहले रखाइन प्रांत में हिंसा से जुड़े तथ्यों को जानना चाहिए।"

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, 'इस संकट को मुस्लिम चरमपंथियों ने पैदा किया है। इन्होंने म्यांमार में सरकारी बलों पर हमला शुरू किया था। आगे चलकर म्यांमार के सुरक्षाबलों को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।

अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुस्लिम और बहुसंख्यक बौद्ध आबादी के बीच जातीय और धार्मिक संघर्ष की जमीन लंबे समय से तैयार हो रही थी।''

ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि जिस तरह से मलाला को अपने देश के कई मुद्दों के बारे में पता नहीं रहता है उसी तरह से इस समस्या के बारे में भी उनकी अधूरी जानकारी है।

चीन के इस सरकारी अखबार ने लिखा है, ''म्यांमार में रोहिंग्या संकट काफी जटिल है और इसका समाधान छोटे समय में नहीं किया जा सकता है।''

मलाला तालिबान से निडर होकर लड़ें

Myanmar
ग्लोबल टाइम्स ने मलाला को लेकर आगे लिखा है, 'मलाला को तालिबान के साथ निडर होकर लड़ने के लिए नोबेल दिया गया था। मलाला खुद ही आतंकवाद से पीड़ित रही हैं। 

उन्हें अपने अनुभवों के आधार पर मुस्लिम आतंकवादियों के बारे में सोचना चाहिए। मुस्लिम अतिवादी समूह और कथित इस्लामिक स्टेट जैसे संगठन दुनिया भर में कई हमलों के लिए जिम्मेदार हैं।''
विज्ञापन

Talveer Singh
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, 'म्यांमार में चरपंथियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मलाला बिल्कुल बेखबर है। उन्हें म्यांमार की स्थिति के बारे में पढ़ना चाहिए। सू की के खिलाफ मलाला की अलोचना बिल्कुल अनुचित है।

शांति के अग्रदूत बनने के मुकाबले अभी मलाला को बहुत सीखने की जरूरत है। 2012 में मलाला की मुस्लिम चरपंथियों ने लगभग हत्या कर दी थी और उन्हें मुस्लिम चरमपंथियों को पहले निशाने पर लेना चाहिए।

मलाला के इस बयान पर भारत में भी लोगों की प्रतिक्रिया सामने आई है। वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह ने मलाला पर निशाना साधते हुए लिखा है, 'अन्य नोबेल विजेताओं की तरह मलाला ने भी पाकिस्तानी आर्मी जो बलूचिस्तान में काम कर रही है उसकी निंदा करते कभी नहीं सुना।''

पढ़ें: रोहिंग्या मुस्लिमों पर हो रही हिंसा पर दलाई लामा ने जताया दुख
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें