ब्रिक्स देशों के घोषणापत्र में पाकिस्तान का नाम लिए बिना जैश, लश्कर और हक्कानी नेटवर्क का नाम आतंकी नेटवर्क में जोड़ने के बाद भले ही पाक ने इस घोषणापत्र को खारिज कर दिया हो, लेकिन वहां के सबसे बड़े मीडिया समूह ने पाक सरकार को चेताया है कि वह इसे हल्के में न ले। पाक के प्रमुख अखबार ‘डॉन’ ने अपने संपादकीय में भारत का जिक्र करते हुए बेबाकी से लिखा कि उसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरा और जोरदार प्रभाव है।
संपादकीय में लिखा गया, ‘घोषणापत्र का संदेश दोस्त और शत्रु दोनों के लिए एक समान है। आतंकी गुटों पर पाकिस्तान की सहिष्णुता अब स्वीकार्य नहीं है और देश को अंतरराष्ट्रीय विचारों के साथ रहने के लिए गंभीर राष्ट्रीय कोशिशों की जरूरत है। ब्रिक्स घोषणा में जिस तरह से अफगानिस्तान में हिंसा और तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, जैश और लश्कर की निंदा की गई, वह बताती है कि इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
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पांच देशों के समूह में भारत की मौजूदगी स्पष्ट रूप से घोषणापत्र की भाषा में उसका प्रभाव दर्शा रही है। इसमें पाकिस्तान की तरफ सीधे-सीधे इशारे को हमें समझना होगा। यही नहीं चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने भी भारत के सुर में सुर मिलाए हैं।’
पाक अखबार ने बेहद स्पष्ट शब्दों में लिखा कि - ‘पाकिस्तान को दुनिया की अग्रणी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के संकेत को खारिज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। इन्हें केवल भारत, अफगानिस्तान व अमेरिका की चिंताओं के बारे में सोचकर भी नहीं लिया जा सकता है।’
आगे लिखा, ‘निश्चित रूप से भारत, अफगानिस्तान और अमेरिका के आरोपों ने पाकिस्तान पर अत्यधिक दोषारोपण की कोशिश की है लेकिन यह भी सच है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान बेपरवाह हो गया है।'