शी जिनपिंग-नरेंद्र मोदी-इमरान खान (फाइल फोटो)
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आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने वाले पाकिस्तान का साथ उसके सदाबहार दोस्त कहे जाने वाले चीन और सऊदी अरब ने छोड़ दिया है। पेरिस में चल रही वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की बैठक में चीन ने भारत, अमेरिका, यूरोपीय देशों और सऊदी अरब का साथ दिया। इन सभी देशों ने पाकिस्तान से कहा है कि उसे आतंकी वित्तपोषण और मनी लांड्रिंग के मामले में सख्त कार्रवाई करनी होगी। साथ ही आतंकी संगठन के सभी नेताओं को सजा और अभियोजन के दायरे में लाना होगा।
राजनयिक सूत्रों का कहना है कि केवल तुर्की ऐसा देश हो जो इससे अलग रहा और उसने पाकिस्तान को ग्रे सूची से बाहर किए जाने की मांग की। चीन का यह कदम काफी चौंकाने वाला है क्योंकि एफएटीएफ में उसने हमेशा पाकिस्तान का साथ दिया है। सूत्रों का कहना है कि यह अब साफ हो गया है कि पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे सूची में ही रहेगा और यदि इस साल जून तक वह पर्याप्त कदम नहीं उठाता है तो उसे इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। इसे लेकर गुरुवार को आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
पिछले साल महाबलिपुरम में हुई दूसरी अनौपचारिक बैठक के बाद विदेश मंत्रालय ने बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आतंकवाद को लेकर चिंतित थे। मोदी और जिनपिंग ने एक बयान में कहा था, 'ऐसे देश जो बड़े और विविध हैं, यह सुनिश्चित करने के लिए अपने संयुक्त प्रयासों को जारी रखेंगे कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय दुनिया भर में और गैर-भेदभाव के आधार पर आतंकवादी समूहों के खिलाफ प्रशिक्षण, वित्त पोषण के खिलाफ रूपरेखा को मजबूत करेगा।'
जून में होगी समीक्षा
अब एफएटीएफ की अगली बैठक जून में होगी। जिसमें पाकिस्तान द्वारा आतंकी वित्तपोषण, मनी लांड्रिंग और आतंकी सरगनाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई की गहन समीक्षा की जाएगी। यदि चार महीने में पाकिस्तान एफएटीएफ की मांगों को पूरा नहीं कर पाता है तो उसे कालीसूची में डाल दिया जाएगा।