बलूचिस्तान अवामी पार्टी (बीएपी) ने बुधवार को यह साफ कर दिया कि उसका पीटीआई से रिश्ता टूट चुका है। पार्टी के नेता खालिद मागसी ने अखबार डॉन को दिए इंटरव्यू में कहा- ‘हम तीन साल तक पीटीआई के नेतृत्व वाले गठबंधन में रहे। अब हमारी निगाह विपक्ष की तरफ है कि वह बलूचिस्तान के बेहतरी के लिए क्या विकल्प हमारे सामने रखता है।’
पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) का रुख अस्पष्ट
पीटीआई की सहयोगी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) का रुख अस्पष्ट बना हुआ है। पार्टी के नेता परवेज इलाही ने ऐसे संकेत दिए हैं, जिनके दो मतलब निकाले जा सकते हैं। यानी उनकी पार्टी पीटीआई के साथ बनी रह सकती है, लेकिन अगर विपक्ष ने बेहतर ऑफर दिया, तो वह अविश्वास प्रस्ताव पर इमरान खान सरकार के खिलाफ मतदान कर सकती है।
अभी तक के घटनाक्रम से विपक्ष दलों का हौसला बढ़ा हुआ है। नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता शाहबाज शरीफ ने घोषणा कर दी है कि इमरान खान सरकार को हटाने के बाद विपक्षी दल ‘राष्ट्रीय सरकार’ का गठन करेंगे, जिसमें पीटीआई के अलावा बाकी सभी दलों को शामिल किया जाएगा। एक प्राइवेट टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि राष्ट्रीय सरकार का विचार विपक्षी दलों के बीच विचार-विमर्श से उभरा है। शाहबाज शरीफ पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा- ‘मेरी राय में हम पीटीआई के बिना राष्ट्रीय सरकार बना सकते हैं, जो पूरी ईमानदारी से अगले पांच साल तक देश की सेवा करेगी।’
विपक्षी दलों को बताया ‘तीन चूहे’
सत्ता पक्ष की ओर से शाहबाज शरीफ के इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है। सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने आरोप लगाया है कि शाहबाज शरीफ ने संविधान की सीमा लांघते हुए ये बयान दिया है। चौधरी ने दावा किया कि पीटीआई आज भी देश में सबसे लोकप्रिय पार्टी है। पीटीआई नेताओं का रुख आक्रामक बना हुआ है। बुधवार को एक जनसभा में इमरान खान ने अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली तीनों प्रमुख पार्टियों को ‘तीन चूहे’ कह कर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वे ‘एक ही गेंद से इन तीनों का शिकार कर लेंगे।’
इस बीच 27 मार्च को अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाले मतदान के समय राजधानी इस्लामाबाद में हिंसा की आशंका लगातार गहराती जा रही है। इमरान खान ने उस दिन यहां दस लाख लोगों की रैली करने का एलान किया है। इसके जवाब में विपक्ष ने उस दिन 20 लाख लोगों को यहां लाने की घोषणा की है। उधर विपक्ष ने बातचीत से मसले का हल निकालने की सत्ताधारी पार्टी की पेशकश को सिरे से ठुकरा दिया है।
शाहबाज शरीफ ने कहा- ‘उस व्यक्ति से बात नहीं हो सकती, जिसने सभी तरह के शिष्टाचार को छोड़ दिया है।’ शरीफ ने दावा किया कि बीएपी के अलावा पीएमएल-क्यू और एमक्यूएम-पी ने अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार के खिलाफ मतदान करने का वादा विपक्षी नेताओं से किया है।