पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पहले मंदिर के निर्माण का कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन भले विरोध कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान उलेमा परिषद (पीयूसी) ने मंदिर निर्माण का समर्थन किया है। पीयूसी का कहना है कि संविधान में हर किसी के अधिकार साफ साफ दिए गए हैं। कृष्ण मंदिर का निर्माण राजधानी के एच-9 प्रशासनिक खंड में 20,000 वर्ग फुट के भूखंड पर किया जाना है।
अंग्रेजी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पीयूसी ने कहा कि पाकिस्तान का संविधान देश में रह रहे मुसलमानों और गैर मुस्लिमों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। पीयूसी के अध्यक्ष हाफिज मोहम्मद ताहिर महमूद अशरफी ने कहा, हम मंदिर निर्माण को लेकर उठे विवाद की निंदा करते हैं। रूढ़िवादी धर्मगुरुओं द्वारा ऐसा किया जाना ठीक नहीं है। पीयूसी एक बैठक बुलाएगी और इस्लामी विचारधारा परिषद (सीआईआई) के सामने अपनी बात भी रखेगी। कई इस्लामी धर्मगुरु और विभिन्न इस्लामी परंपराओं के कानून विद पीयूसी के सदस्य हैं।
सीआईआई एक सांविधानिक निकाय है, जिसका काम पाकिस्तान सरकार को इस्लामी मुद्दों पर कानूनी सलाह देना है। पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने कुछ मुस्लिम समूहों के विरोध के बीच इस्लामाबाद में मंदिर निर्माण के लिए सरकार द्वारा अनुदान दिए जाने पर सीआईआई को पत्र लिखकर उसकी राय मांगी है।