पाकिस्तान ने अफगान तालिबान पर दबाव बढ़ाने का फैसला किया है। खबरों के मुताबिक उसने तालिबान को यह संदेश दिया है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पर काबू पाने की वह कितनी कोशिश करता है, उससे ही आतंकवादी गुटों को अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल न करने देने के उसके एलान की परीक्षा होगी। पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ये जानकारी पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून को दी। उनके मुताबिक तालिबान से कहा गया है कि टीटीपी के मामले में उसके रुख से अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसके असली रुख का अनुमान लगाएगा।
अधिकारी ने कहा- ‘हमने तालिबान के नेतृत्व से कहा है कि टीटीपी एक टेस्ट केस है। अगर तालिबान पाकिस्तान की चिंता को दूर नहीं कर सकता, तो फिर उनकी इस बात पर कौन भरोसा करेगा कि वे अल-कायदा और ऐसे दूसरे गुटों से रिश्ता तोड़ लेंगे।’ कुछ समय पहले तक ये समझ थी कि तालिबान और पाकिस्तान सरकार के बीच करीबी संबंध हैं। लेकिन हाल में कुछ मुद्दों को लेकर दोनों के बीच मतभेद खड़े होने के संकेत मिले हैं। उनमें एक मुद्दा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से बाड़ लगाने का भी है।
बताया जाता है कि पिछले अगस्त में जब काबुल पर तालिबान ने कब्जा किया, तभी पाकिस्तान सरकार ने उसके सामने अपनी मांगें भेजी थीं। उसने टीटीपी आतंकवादियों की एक सूची भी तालिबान को सौंपी थी और उन्हें पाकिस्तान को सौंपने की मांग की थी। लेकिन तालिबान ने इसके बदले पाकिस्तान और टीटीपी के बीच बातचीत शुरू कराने की पहल कर दी। पाकिस्तान ने इस पहल को स्वीकार किया। उसी के तहत बीते नवंबर में पाकिस्तान सरकार और टीटीपी के बीच एक महीने के लिए युद्धविराम का समझौता हुआ था।