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पाकिस्तान: सिंध प्रांत के स्कूलों का अजब हाल, 11 हजार स्कूलों में शिक्षक तो हैं पर पढ़ने वाला कोई नहीं

Fri, 04 Mar 2022 03:49 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में इसका खुलासा किया गया है। इन रिपोर्ट्स में बताया गया है कि यहां 11000 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें शिक्षक तो है लेकिन छात्र नहीं। और इन स्कूलों में तैनात शिक्षकों को बिना काम के हर माह सैलरी दी जाती है। 
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पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 11000 स्कूल ऐसे जहां बच्चे नहीं आते। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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पाकिस्तान के सिंध से हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 11000 स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चे नहीं बल्कि भूत पढ़ते हैं। इतना ही नहीं यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों को मोटी सैलरी दी जाती है। हम ये इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि यहां 11000 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें शिक्षक तो है लेकिन छात्र नहीं आते और  इन स्कूलों में तैनात शिक्षकों को बिना काम के हर माह सैलरी दी जाती है।

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द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार में छपी एक रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि सिंध प्रांत के ये स्कूल पाकिस्तान के सीमित संसाधनों के लिए बोझ बने हुए हैं। दरअसल, एक दो नहीं बल्कि 11000 हजार स्कूलों में तैनात शिक्षकों को बिना काम के ही वेतन दिया जा रहा है, जिससे पाकिस्तान के राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि सिंध के ग्रामीण इलाकों में प्रति एक हजार बच्चों पर 1.8 स्कूल हैं। इसमें से 15 प्रतिशत प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में दो शिक्षक हैं। 

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चूंकि इन स्कूलों में बच्चे नहीं आते इसलिए  सत्ता और पावर में रहने वाले लोगों ने इन स्कूलों पर कब्जा जमा लिया है। ये लोग इन स्कूलों में गेस्ट हाउस का संचालन करते हैं।
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मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया है कि आखिर क्यों इन स्कूलों में बच्चे पढ़ने के लिए नहीं आते। दरअसल, सिंध के इन स्कूलों में बच्चों के लिए मूलभूत और प्राथमिक सुविधाएं भी नहीं हैं। यहां पीने का पानी, शौचालय, खेल का मैदान, चहारदीवारी, यहां तक कि बैठने के लिए बेंच तक नहीं हैं। ऐसे में सवाल ये भी है कि अगर बच्चे आएं भी तो पढ़ेंगे कैसे। 

 द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार के मुताबिक, इन स्कूलों में अभी तक बच्चों का नामांकन भी हो रहा था, लेकिन अब बच्चों ने नामांकन कराना भी बंद कर दिया है।  

लोगों और आलोचनों ने इसे लेकर सरकार की आलोचना की है। उन्होंने सरकार से कहा है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों को बेहतर वेतन दिया जाए और बच्चों को सभी मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएं, तभी बच्चे इन स्कूलों में पढ़ने के लिए आएंगे। 

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