पाकिस्तान की सीनेट ने दो-तिहाई बहुमत से विवादास्पद 27वें संवैधानिक संशोधन को मंजूरी दे दी। इस बिल से ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ का नया पद बनाया जाएगा और एक संवैधानिक अदालत की स्थापना होगी, जो संविधान संबंधी मामलों की सुनवाई करेगी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट अब केवल सिविल और आपराधिक मामलों को देखेगी।
पाकिस्तान की संसद के ऊपरी सदन सीनेट ने सोमवार को विवादास्पद 27वें संवैधानिक संशोधन बिल को मंजूरी दे दी। इस बिल के जरिए पाकिस्तान में ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (सीडीएफ) नाम का एक नया पद बनाया जाएगा और एक संवैधानिक अदालत की स्थापना की जाएगी। यह बिल पिछले कई हफ्तों से विवादों में था। बिल के अनुसार, अब एक फेडरल कांस्टीट्यूशनल कोर्ट बनाई जाएगी जो संविधान से जुड़े मामलों को देखेगी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट अब केवल सिविल और आपराधिक मामलों की सुनवाई करेगी।
बिल में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि यह प्रमुख हमेशा पाकिस्तानी सेना से होगा। सरकार अब सेना, वायुसेना और नौसेना के अधिकारियों को क्रमशः फील्ड मार्शल, मार्शल ऑफ एयर फोर्स और एडमिरल ऑफ द फ्लीट जैसे उच्च रैंक तक पदोन्नत कर सकेगी। वहीं फील्ड मार्शल का दर्जा जीवनभर रहेगा।
इससे पहले सीनेट और नेशनल असेंबली की संयुक्त स्थायी समिति की बैठक में भी विपक्ष ने बहिष्कार किया था। समिति के अध्यक्ष फारूक नाइक ने बताया कि समिति ने दो दिन तक विचार-विमर्श कर कई बदलाव किए और फिर बिल को मंजूरी दी। अब बिल को नेशनल असेंबली (राष्ट्रीय सभा) से भी पारित होना है, जहां सरकार के पास 233 सदस्य हैं, जो दो-तिहाई बहुमत (226) से अधिक हैं। इसलिए बिल के पारित होने की पूरी संभावना है।