पाकिस्तान को एफएटीएफ ने बड़ा झटका दे दिया है। आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने और आर्थिक अपराध को रोकने के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित में नाकाम रहने पर एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं किया है।
किन देशों को रखा जाता है ग्रे सूची में
आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के सबसे ज्यादा जोखिम वाले देशों को ग्रे सूची में शामिल किया जाता है। पाकिस्तान को जून 2018 में इस सूची में रखा गया था। 27 मुद्दों को लागू कर वैश्विक चिंताओं को दूर करने के लिए समयसीमा दी गई थी। पिछले साल अक्तूबर में एफएटीएफ ने बैठक में पाकिस्तान फरवरी 2021 तक इस सूची में बनाए रखने का फैसला किया था।
दरअसल, पाकिस्तान वह छह प्रमुख दायित्वों को पूरा करने में नाकाम रहा था, जिनमें भारत के दो सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों मौलाना मसूद अजहर और हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल था। एक रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एफएटीएफ की आगामी बैठक के नतीजे को लेकर आशा जताई थी, लेकिन अधिकारियों का मानना था कि पाकिस्तान कम से कम जून तक ग्रे सूची में शामिल रहेगा।