पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान आखिरकार सियासी पिच पर क्लीन बोल्ड हो गए। नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान टालने का हर प्रयास शनिवार आधी रात बाद नाकाम हो गया। मध्यरात्रि बाद मतदान में अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया गया। हार के बाद इमरान ने देर रात पीएम हाउस छोड़ दिया। प्रस्ताव के पक्ष में 174 वोट पड़े। इस दौरान इमरान और उनकी पार्टी के सांसद सदन में गैरमौजूद रहे।
विश्वास मत के नतीजे के बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने देश के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर सदन को बधाई दी। उन्होंने कहा, "नामुमकिन कुछ भी नहीं है। पुराने पाकिस्तान में आपका स्वागत है। तीन साल से बोझ उठा रहा था मुल्क। जुर्म है, बढ़ता है, मिट जाता है। तीन-चार साल में सब सीख लिया जो पूरी जिंदगी में नहीं सीखा।"
पीएमएल-एन नेता मरियम नवाज ने ट्वीट कर कहा कि "इतिहास का सबसे काला दौर खत्म हुआ। देश के बुरे ख्वाब के दिन खत्म हो गए।"
सेनाध्यक्ष जनरल बाजवा की बर्खास्तगी की थी तैयारी
सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा को बर्खास्त करने के लिए इमरान तैयार थे। डॉन न्यूज के मुताबिक, वकील अदनान इकबाल ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ऐसा कदम उठाने से रोकने की मांग की। हाईकोर्ट में आधी रात के बाद भी याचिका पर सुनवाई जारी थी।
पुलिस की छुट्टियां रद्द, एयरपोर्ट अलर्ट
देर रात पाकिस्तान में सभी पुलिस अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गईं। हवाईअड्डे अलर्ट पर हैं। इससे संकेत जा रहा है कि जल्द ही कुछ बड़े कदम उठाए जा सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इमरान खान और असद कैसर को गिरफ्तार किया जा सकता है।
इमरान खान ने छोड़ा प्रधानमंत्री आवास
इस बीच, पीटीआई के सांसद फैसल जावेद ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले ही इमरान खान ने प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास छोड़ दिया। फैसल ने ट्वीट किया, 'अभी-अभी प्रधानमंत्री इमरान खान प्रधानमंत्री आवास से विदा हुए। वह शालीनता से विदा हुए और झुके नहीं।'
शनिवार को पल-पल बदलते घटनाक्रम के बीच देर रात को शुरू हुए मतदान के नतीजे में संयुक्त विपक्ष को 342-सदस्यीय नेशनल असेंबली में 174 सदस्यों का समर्थन मिला, जो प्रधानमंत्री को अपदस्थ करने के लिए आवश्यक बहुमत 172 से अधिक रहा।
बता दें कि इमरान खान 2018 में एक नया पाकिस्तान बनाने के वादे के साथ सत्ता में आए थे, लेकिन आर्थिक कुप्रबंधन के दावों से परेशान थे क्योंकि उनकी सरकार विदेशी मुद्रा भंडार और दोहरे अंकों की मुद्रास्फीति को कम करने से जूझ रही थी। पिछले साल आईएसआई एजेंसी के प्रमुख की नियुक्ति का समर्थन करने से इनकार करने के बाद उन्होंने स्पष्ट रूप से शक्तिशाली सेना का समर्थन भी खो दिया था। अंत में वह नदीम अहमद अंजुम को आईएसआई प्रमुख बनाने में कामयाब रहे, लेकिन शक्तिशाली सेना के साथ अपने संबंधों को खराब कर लिया। गौरतलब है कि अबतक किसी भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है।