पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने एक कार्यवाहक सरकार बनाने के आदेश के साथ-साथ गिलगित-बाल्टिस्तान प्रांत में चुनाव कराने का आदेश दिया है। पाकिस्तान के इस कदम का भारत द्वारा कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
बता दें कि, 30 अप्रैल को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट द्वारा संघीय सरकार को क्षेत्र में आम चुनाव कराने के लिए 2018 के प्रशासनिक आदेश में संशोधन करने की अनुमति देने के कुछ दिनों बाद राष्ट्रपति ने यह आदेश दिया है।
2018 का गिलगित-बाल्टिस्तान आदेश प्रशासनिक बदलावों के लिए प्रदान किया गया था, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को विषयों की एक श्रृंखला पर कानून बनाने का आदेश देना शामिल है।
पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गिलिगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने की अनुमति देने के बाद इस्लामाबाद द्वारा क्षेत्र में किए गए परिवर्तनों और क्षेत्र में अवैध और जबरन कब्जे को लेकर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
इससे पहले, भारतीय विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में कहा था कि भारत ने पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनयिक को आपत्ति पत्र जारी किया और तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय के आदेश पर पाकिस्तान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। साथ ही कहा था कि पाकिस्तान को बता दिया गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग हैं।
कश्मीर मामलों और गिलगित-बाल्टिस्तान के संघीय मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी किए गए अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति अल्वी ने गिलगित-बाल्टिस्तान में पारदर्शी चुनाव कराने के लिए 'गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव और कार्यवाहक संशोधन आदेश, 2020' को लागू किया। गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा 24 जून को अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी।
राष्ट्रपति के आदेश में कहा गया कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान में कार्यवाहक सरकार स्थापित करने के लिए कानूनों को अपनाना आवश्यक है।
डॉन अखबार की खबर के अनुसार, गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष सैयद जाफर शाह ने कहा कि इस क्षेत्र में कार्यवाहक सरकार बनाने का कोई प्रावधान नहीं था और राष्ट्रपति के आदेश के बाद इस कठिनाई को हटा दिया गया है।