पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी
- फोटो : सोशल मीडिया
2014 में सत्तारूढ़ तहरीक-ए इंसाफ पार्टी के सदस्यों द्वारा पाकिस्तान टेलीविजन (पीटीवी) और संसद भवन पर किए गए हमले के सिलसिले में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अलवी शुक्रवार को कोर्ट में पेश हुए। राष्ट्रपति इस्लामाबाद में आतंकवाद विरोधी अदालत में पेश हुए थे।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के 31 अगस्त 2014 को धरने के दौरान पाकिस्तान टेलीविजन (पीटीवी) और संसद भवन पर हमला हुआ था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए पीटीवी पर नियंत्रण कर लिया था, लेकिन सेना ने उन्हें वहां से हटा दिया।
इसके बाद पुलिस ने आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत हिंसा भड़काने के लिए पीटीआई प्रमुख और प्रधानमंत्री इमरान खान और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं जैसे कि अल्वी, असद उमर, शाह महमूद कुरैशी, शफकत महमूद और राजा खुर्रम नवाज के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
इस्लामाबाद में एटीसी न्यायाधीश मोहम्मद अली वाराइच के सामने अल्वी अपने वकील बाबर अवान के साथ पेश हुए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 248 के तहत राष्ट्रपति की प्रतिरक्षा का लाभ उठाने से इनकार करने के लिए एक आवेदन दायर किया। उन्होंने अदालत से कहा कि मैं इसे (इम्युनिटी) वापस लेना चाहता हूं क्योंकि मेरा मानना है कि किसी के बीच कोई अंतर नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही वह इस टैग से बचना चाहते हैं कि वह अदालत के सामने पेश नहीं हुए थे।
न्यायाधीश के समक्ष अल्वी ने शीघ्र ही न्याय दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि 1971 में उनके पिता ने एक मुकदमा दायर किया था जो आज भी लंबित है। अदालत द्वारा सुनवाई पूरी करने और पिछले महीने फैसला सुरक्षित रखने से पहले यह मामला सालों तक ऐसे ही अटका रहा। अब इसकी घोषणा 9 मार्च को की जाएगी। उन्होंने कहा कि वह फैसला आने से पहले अपना पक्ष रखना चाहते थे।
अदालत में पेश होने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए अल्वी ने कहा कि वह भी किसी आम पाकिस्तानी की तरह अदालत में न्याय मांगने आए थे। उन्होंने कहा कि आज मैं अदालत के सामने एक आम नागरिक की तरह पेश हुआ, पाकिस्तान के राष्ट्रपति की तरह नहीं।