लंबे समय से नए चुनाव की मांग कर रहे पाकिस्तान के विपक्षी दल अब आम चुनाव में उतरने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। इससे इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को प्रचार में बढ़त बनाने का मौका मिला है। पीटीआई ने अपना चुनाव अभियान पूरी तरह शुरू कर दिया है। इस बीच देश में ये राय मजबूत हो रही है कि मौजूदा राजनीतिक संकट का टिकाऊ हल नया चुनाव कराना ही है।
पाकिस्तान के संविधान का खुलेआम उल्लंघन
फिलहाल, सियासी हलकों में निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तरफ टिकी हुई हैं। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का फैसला पाकिस्तान में लोकतंत्र के दूरगामी भविष्य के लिए अहम होगा। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खकन अब्बासी ने कहा है- ‘हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट संविधान की रक्षा करेगा। वह संविधान के प्रावधानों के मुताबिक राजनीतिक व्यवस्था के भविष्य की दिशा निर्धारित करेगा।’ अब्बासी ने टीवी चैनल अल-जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में कहा- ‘पाकिस्तान के संविधान का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी उल्लंघन किया गया, तो देश में अराजकता पैदा हो जाएगी।’
पीटीआई सरकार की सिफारिश पर नेशनल असेंबली भंग की जा चुकी है। अगर सुप्रीम कोर्ट ने रोक नहीं लगाई, तो अब तीन महीनों के अंदर नया चुनाव होना चाहिए। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि विपक्षी दलों को भी इसमें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। वे लंबे समय से नया चुनाव कराने की मांग कर रहे थे। लेकिन अब उन्होंने अपना रुख बदल लिया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से नेशनल असेंबली बहाल करने की गुजारिश की है।
लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह महज एक सियासी दांव है। विश्लेषक सुहैल वाराइच ने अल-जजीरा से कहा- ‘मेरी राय में चुनाव होना अब अवश्यंभावी है।’ जबकि पूर्व रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा- ‘मेरी पार्टी पीएमएल-नवाज नए चुनाव के लिए तैयार है, लेकिन संविधान के उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सीनेटर शेरी रहमान भी मंजूर किया है कि समय से पहले चुनाव उनकी पार्टी की मांग रही है।
तीन महीनों के अंदर चुनाव कराना संभव नहीं
पाकिस्तानी अखबारों में छपी रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने कार्यवाहक सरकार के गठन के लिए विपक्ष के नेता से राय-मशविरे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग ने कहा है कि तीन महीनों के अंदर चुनाव कराना संभव नहीं है।
थिंक टैंक पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ लेजिस्लेटिव डेवलमेंट एंड ट्रांसपैरेंसी के अध्यक्ष बिलाल महबूब ने निर्वाचन आयोग के इस बयान पर हैरत जताई है। उन्होंने अल जजीरा से कहा- ‘निर्वाचन आयोग से अपेक्षा यह रहती है कि वह हर वक्त चुनाव के लिए तैयार रहे।’ हालांकि महबूब ने यह भी कहा कि नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर ने जिस तरह विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया, वह असंवैधानिक था।
विश्लेषकों की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इसलिए टिकी है, क्योंकि इससे तय होगा कि क्या न्यायपालिका विधायिका की अंदरूनी कार्यवाही पर निर्णय दे सकती है। पीटीआई का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 69 के तहत कोर्ट ऐसा नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट नेशनल असेंबली भंग करने के राष्ट्रपति के फैसले की संवैधानिकता पर भी अपना निर्णय देगा।