फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमेरिका: विशेषज्ञों ने बनाया पीपुल्स सीडीसी, सरकारी संस्था डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन पर लगाए गंभीर आरोप

Wed, 06 Apr 2022 03:06 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

विश्लेषकों के मुताबिक इन विशेषज्ञों ने जो कहा है, वह अमेरिका के अलावा अन्य देशों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। उनकी सबसे अहम चेतावनी यह है कि कोरोना महामारी अभी खत्म नहीं हुई है। बल्कि इसके नए वैरिएंट्स को लेकर अभी बहुत सी अनिश्चितताएं बाकी हैं। इसके अलावा लॉन्ग कोविड और कोरोना संक्रमण का इलाज ढूंढने की चुनौतियां भी बनी हुई हैं...
विज्ञापन
अमेरिका की बहुचर्चित संस्था डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका की बहुचर्चित संस्था डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ये आरोप खुद अमेरिका के लगभग 15 संक्रामक रोग विशेषज्ञों ने लगाए हैं। उनका इल्जाम है कि सीडीसी कॉरपोरेट सेक्टर की मर्जी के मुताबिक चल रहा है। ये संस्था अपने फैसले उन कंपनियों के मुनाफे को ध्यान में रख कर ले रही है। इन विशेषज्ञों का एक लंबा बयान ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में छपा है। इसके मुताबिक इन विशेषज्ञों ने सीडीसी के समानांतर अपनी संस्था बनाने का फैसला किया है। इसका नाम ‘पीपुल्स सीडीसी’ रखा गया है।

विज्ञापन


बयान में कहा गया है- ‘ओमिक्रॉन का नया वैरिएंट बीए-2 अमेरिका में अपने पांव जमा रहा है। लेकिन एंथनी फाउची और अन्य अधिकारियों ने कहा है कि इससे अमेरिका में कोरोना महामारी की नई लहर आने की संभावना नहीं है। जबकि बीए-2 दुनिया के कई हिस्सों में कहर ढा रहा है। इधर जिन नीतियों और व्यवहार संबंधी नियमों से हम नई लहर को रोक सकते हैं, अमेरिका में उन्हें छोड़ दिया गया है। ऐसा आंशिक रूप से सीडीसी की कोविड का खतरा मापने की नई व्यवस्था के कारण हुआ है।’

जनता के सीडीसी की जरूरत

बयान के मुताबिक कुछ लोग दावा करते हैं कि सीडीसी विज्ञान के मुताबिक चलता है और यथासंभव जरूरी कदम उठाता है। विशेषज्ञों ने कहा- ‘लेकिन अगर मकसद संक्रमण और पीड़ा को रोकना है, तो सीडीसी की ताजा सिफारिशें विज्ञान या समता के सिद्धांत के मुताबिक नहीं हैं। बल्कि ये कहना अधिक सही होगा कि सीडीसी पैसे का अनुपालन कर रही है। उसने लोगों- खास कर अधिक खतरे वाले लोगों की जरूरतों के ऊपर कॉरपोरेट अमेरिका की इच्छाओं को तरजीह दी है।’ बयान में कहा गया- ‘हमें ऐसे सीडीसी की जरूरत है, जो लोगों को सेहत को प्राथमिकता दे, न कि बड़ी कंपनियों की सेहत को। हमें जनता के सीडीसी की जरूरत है, जिसका गठन हमने किया है।’

विश्लेषकों के मुताबिक इन विशेषज्ञों ने जो कहा है, वह अमेरिका के अलावा अन्य देशों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। उनकी सबसे अहम चेतावनी यह है कि कोरोना महामारी अभी खत्म नहीं हुई है। बल्कि इसके नए वैरिएंट्स को लेकर अभी बहुत सी अनिश्चितताएं बाकी हैं। इसके अलावा लॉन्ग कोविड और कोरोना संक्रमण का इलाज ढूंढने की चुनौतियां भी बनी हुई हैं। इसलिए विशेषज्ञों ने ऐसे तमाम दावों को सिरे ठुकरा दिया है कि कोरोना वायरस के बारे में अब निश्चित जानकारी मिल चुकी है।

सीडीसी के गाइडलाइन की आलोचना

विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि सीडीसी ने राजनीतिक तकाजों के मुताबिक अपने आकलन बदले हैं। मसलन, सीडीसी ने फरवरी में कोविड निगरानी के नए सिस्टम को राष्ट्रपति जो बाइडन के स्टेट ऑफ यूनियन भाषण से ठीक चार दिन पहले जारी किया। इस सिस्टम में कोविड संक्रमण के खतरों को नजरअंदाज किया गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि राष्ट्रपति बाइडेन कोविड के खिलाफ जीत का दावा अपने भाषण में शामिल कर सकें।

विज्ञापन


पीपुल्स सीडीसी अभियान से जुड़े विशेषज्ञों ने क्रमवार सीडीसी के गाइडलाइन की आलोचना पेश की है। उनके कथन का सार यह है कि सीडीसी ने जानबूझ कर कोविड संक्रमण के खतरों को कम करके बताया है, जबकि इसकी वजह से यह खतरा बढ़ गया है कि लोग खुद अपना नुकसान कर लेँ।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें