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लब की आजादी पर अंकुश: सोशल मीडिया पर नियंत्रण में जुटी इमरान सरकार, ऐसी पोस्ट पर होगी पांच साल जेल

Mon, 21 Feb 2022 01:26 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सोशल मीडिया पर नियंत्रण के इरादे से यह कानूनी प्रावधान किया गया है। इमरान सरकार ने प्रिवेंशन आफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) में संशोधन किया है। 
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पाकिस्तान के हुक्मरानों को सोशल मीडिया में अपनी आलोचना नागवार गुजर रही है। इसलिए इमरान सरकार ने अब सोशल मीडिया में पोस्ट पर अंकुश लगा दिया है। पाक सोशल मीडिया में किसी भी व्यक्ति का अपमान करने पर अब पांच साल की जेल होगी। इस अपराध को गैर जमानती बनाया गया है। 

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सोशल मीडिया पर नियंत्रण के इरादे से यह कानूनी प्रावधान किया गया है। इमरान सरकार ने प्रिवेंशन आफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) में संशोधन किया है। पाक मीडिया संगठन व पत्रकार इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। उन्होंने इसे जनता के मूलभूत अधिकार का हनन करने वाला काला कानून बताया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी द्वारा जारी एक अध्यादेश के जरिए इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम कानून, 2016 (PECA) के प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं। इससे कुछ दिन पहले पाक संचार मंत्री मुराद सईद के खिलाफ अभद्र टिप्पणियों के लिए मीडिया महारथी मोहसिन बेग को गिरफ्तार किया गया था। 
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कानून मंत्री बैरिस्टर फारुख नसीम ने भी चेतावनी दी थी कि फर्जी खबरों फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम (संशोधन) अध्यादेश, 2022 लागू किया गया। नसीम ने कहा है कि फर्जी खबरें फैलाने को संज्ञेय अपराध के तौर पर माना जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले जो भी हुआ वह बीती बात है, अब हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं। 

क्या है नया कानूनी प्रावधान
अध्यादेश में पेका की धारा 20 में संशोधन कर किसी व्यक्ति या संस्थान का अपमान करने के लिए जेल की सजा तीन साल से बढ़ाकर पांच साल की गई है। नए कानूनों में ऑनलाइन मंच पर सार्वजनिक मानहानि को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध बना दिया गया है और मामले के शीघ्र निपटारे के लिए एक नई धारा जोड़ी है। इसमें कहा गया है कि मुकदमे की सुनवाई शीघ्रता से की जाए लेकिन मामले पर संज्ञान लेने के बाद छह महीने से ज्यादा की देरी नहीं होनी चाहिए। 

आजाद बोल मंजूर नहीं
इस कानून के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का भी दौर शुरू हो गया है। कुछ लोग कह रहे हैं कि ऐसा लगता है कि इमरान खान को लोगों के आजाद बोल भी मंजूर नहीं हैं।

विपक्ष और मीडिया संस्थानों ने जताया विरोध
पाकिस्तान में लाए गए नए अध्यादेश का मीडिया संस्थानों समेत विपक्ष ने भी विरोध किया है। विपक्षी दलों ने इसे नागरिकों के मौलिक अधिकारों को खत्म करने वाला बताया। डॉन अखबार ने इस कदम को धोखा बताया जबकि न्यूज इंटरनेशनल ने इस कानून की निंदा की है।

उधर, पीएमएल-एन और पीपीपी ने कहा है कि अध्यादेश के माध्यम से लाया गया कानून राष्ट्रीय बहस को नकारने तथा संसद को उसके सांविधानिक अधिकार से वंचित करने वाला कदम है। पीएमएल-एन की उपाध्यक्ष मरियम नवाज शरीफ ने ट्वीट किया कि यह कानून मीडिया और विपक्ष की आवाज दबाने के लिए लाया गया है।

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