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Pakistan: देश हो या विदेश, पाकिस्तान में मंत्रियों की है शामत, लगातार झेलनी पड़ रहीं गालियां

Sun, 16 Oct 2022 03:22 PM IST
कुमार सम्भव जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशहाक डार सत्ताधारी गठबंधन के ऐसे तीसरे बड़े नेता बने हैं, जिन्हें विदेश की धरती पर पाकिस्तानियों से ही अपमानित होना पड़ा है। 
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इशहाक डार
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पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशहाक डार सत्ताधारी गठबंधन के ऐसे तीसरे बड़े नेता बने हैं, जिन्हें विदेश की धरती पर पाकिस्तानियों से ही अपमानित होना पड़ा है। इसके पहले सऊदी अरब में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फिर लंदन में वर्तमान सरकार में मंत्री और शरीफ की भतीजी मरियम नवाज को अपमानित होना पड़ा था। शहबाज और मरियम को सरेआम खरी-खोटी पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थकों से सुनाई थी। वॉशिंगटन में डार के साथ वैसी ही घटना हुई, लेकिन उन लोगों की पहचान नहीं हो सकी है। 

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इशहाक डार अंतरराष्ट्रीय कर्जदाता एजेंसियों के अधिकारियों से बातचीत के लिए वॉशिंगटन गए हैं। वहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जब वे उतरे तो प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने उन्हें झूठा कहकर पुकारा। साथ ही उनके खिलाफ दूसरे अपशब्दों का भी इस्तेमाल हुआ। इस घटना का वीडियो यहां सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें देखा गया है कि जब डार ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि वे हमला कर रहे हैं, तो जवाब में वित्त मंत्री को चोर और झूठा कहा गया। एक व्यक्ति उन्हें गाली देता सुना गया। 

इस बीच एक और वैसी ही घटना पाकिस्तान के सरगोधा में हुई है। वहां योजना मंत्री अहसान इकबाल को एक रेस्तरां में कुछ लोगों ने गालियां दीं। बताया जाता है कि वे सभी इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थक थे। वहां जैसे ही उन लोगों की नजर इकबाल पर पड़ी, वे ‘चोर-चोर’ चिल्लाने लगे। पर्यवेक्षकों ने इन घटनाओं को देश में बढ़ रही सियासी असहनशीलता की निशानी बताया है। 
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बताया जाता है कि सत्ताधारी पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के खिलाफ देश में मौजूद ऐसे ही माहौल के कारण शहबाज शरीफ सरकार ने 16 अक्टूबर को होने वाले उप चुनावों को टालने की अर्जी निर्वाचन आयोग को दी थी। लेकिन आयोग ने सरकार की मंशा पर पानी फेर कर दिया। अपनी अर्जी ठुकराए जाने के बाद अब गृह मंत्रालय ने आयोग को उप चुनावों के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है। अब रविवार को आठ संसदीय सीटों के उप चुनाव के लिए मतदान होगा। 

इन उप चुनावों को देश में मौजूदा सियासी माहौल का बैरोमीटर समझा जा रहा है। इसके पहले पंजाब में प्रांतीय असेंबली की 20 सीटों के उप चुनाव में पीडीएम को करारी हार मिली थी। वहां पीटीआई ने 15 सीटों पर जीत दर्ज कर ली थी। उसके बाद सिंध में हुए एक उप चुनाव में भी पीटीआई को कामयाबी मिली। पर्यवेक्षकों के मुताबिक पंजाब और सिंध पहले कभी पीटीआई का गढ़ नहीं रहे। इसलिए उन चुनाव नतीजों को सत्ताधारी गठबंधन के प्रति देशवासियों में मौजूद गुस्से का संकेत माना गया। अब 16 अक्टूबर के उप चुनावों में पर्यवेक्षकों की नजर यह देखने पर है कि क्या पीडीएम अपनी स्थिति सुधार पाया है। 

शहबाज शरीफ सरकार ने हाल में आई भीषण बाढ़ के बाद देश में चल रही राहत कार्यों का हवाला देकर उप चुनाव तीन महीनों के लिए टलवाने की कोशिश की थी। उसने पीटीआई के प्रस्तावित ‘असली आजादी मार्च’ का भी हवाला दिया था और कहा था कि सुरक्षा बल अभी इन कार्यों में व्यस्त हैँ। इसलिए अभी मतदान कराना ठीक नहीं होगा। 

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