अधिकारियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण रोका गया
आठ फरवरी 2024 को होने वाले चुनावों के लिए प्रचार के लिए 54 दिन की अनिवार्य अवधि 16 दिसंबर से शुरू हो रही है। लेकिन, पीटीआई (इमरान खान की पार्टी) की एक याचिका पर लाहौर उच्च न्यायालय (एलएचसी) के आदेश के कारण चुनावी गतिविधियों की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण रोक दिया गया है।
सरकार की ओर से नहीं हुई कोई देरी: सूचना मंत्री
अंतरिम सूचना मंत्री सोलांगी ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से कोई देरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि संघीय सरकार पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) को वित्तीय, प्रशासनिक और सुरक्षा सुविधाएं प्रदान करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने और एलएचसी के फैसले के बाद औपचारिक रूप से चुनाव प्रक्रिया शुरू करने से ठीक पहले निर्वाचन अधिकारियों (आरओ) के प्रशिक्षण को रद्द करना पड़ा।
अदालत ने पीटीआई की याचिका पर सुनाया फैसला
लाहौर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अली बकर नजफी ने आम चुनावों के लिए पंजाब की नौकरशाही से जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीआरओ), आरओ और सहायक निर्वाचन अधिकारियों (एआरओ) की नियुक्ति के खिलाफ पीटीआई द्वारा दायर याचिका के पक्ष में बुधवार को फैसला सुनाया। पार्टी ने अपनी याचिका में न्यायिक अधिकारियों को आरओ के रूप में नियुक्त करने के लिए अदालत की मदद की भी मांग थी।
'चुनाव को लेकर सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं'
सोलांगी ने विभिन्न निजी टीवी समाचार चैनलों के टॉक शो में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अगर चुनाव अगले साल 8 फरवरी को होने थे तो चुनाव आयोग को सियासी दलों को चुनाव प्रचार के लिए 54 दिनों की अनिवार्य अवधि देनी थी, यह अवधि 16 दिसंबर से शुरू होनी थी। मंत्री ने कहा कि अदालत के फैसले से झटका लगा है और चुनाव को लेकर कार्यवाहक सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। सोलंगी ने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग और न्यायपालिका इस मुद्दे का समाधान करेगी।
मंत्री ने चुनाव में देरी के लिए पीटीआई को ठहराया दोषी
अंतरिम मंत्री ने पीटीआई का नाम नहीं लिया। लेकिन उन्होंने चुनाव में देरी की कोशिश के लिए पार्टी को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग तेजी से आम चुनाव कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन एक सियासी दल ने स्पष्ट रूप से इसके लिए बाधाएं पैदा की हैं। सोलंगी ने कहा कि वह चुनाव कराने में देरी की संभावना पैदा करने के प्रयास से हैरान हैं।
एलएचसी के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय पहुंची ईसीपी
उधर, ईसीपी ने निर्वाचन अधिकारियों के रूप में नौकरशाहों की नियुक्ति पर लाहौर उच्च न्यायालय (एलएचसी) के फैसले के खिलाफ शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि आगामी आम चुनावों में संभावित देरी को रोकने के उद्देश्य से यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब कम से कम तीन मुख्य सियासी दलों ने उच्च न्यायालय में सुनवाई कर रहे मामले में पक्षकार बनने की घोषणा की है।
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' अखबार की खबर के मुताबिक, ईसीपी के सचिव ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया। शुक्रवार देर शाम पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) काजी फैज ईसा के नेतृत्व में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की।
सर्वोच्च न्यायालय ने एलएचसी के आदेश को किया रद्द
वहीं, उच्चतम न्यायालय ने एलएचसी के आदेश को निलंबित कर दिया है। शीर्ष अदालत ने पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) को आठ फरवरी को आम चुनाव कराने के लिए आज रात चुनाव कार्यक्रम जारी करने का भी आदेश दिया, जैसा कि चुनाव निकाय ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पहले ही वादा किया था।