खराब शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए वित्तीय सहायता मांगने गए पाकिस्तान को एशियन विकास बैंक ने बड़ी नसीहत दी है। बैंक ने सिफारिश की है कि अपनी शिक्षा प्रणाली को सुधारने और लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए पाकिस्तान भारत की उल्लास योजना को अपनाए।
मनीला की एशियन विकास बैंक ने पाकिस्तान से कहा है कि सरकार एक रणनीतिक और बहु-हितधारक परामर्शी दृष्टिकोण अपनाए। यह भारत सरकार की नई योजना उल्लास जैसा हो सकता है। बैंक ने कहा कि उल्लास योजना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए संघीय और प्रांतीय दोनों सरकारों के सहयोग पर जोर देती है। पाकिस्तान भी ऐसी योजना अपनाकर शिक्षा क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकता है।
एडीबी की सिफारिश एडीबी अध्यक्ष मासत्सुगु असाकावा की पाकिस्तान यात्रा से कुछ दिन पहले आई है। दरअसल, योजना आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में शिक्षा प्रणाली खराब हो गई है। इस्लामाबाद को छोड़कर सभी 134 जिलों में सीखने के परिणाम पिछड़ रहे हैं।
जिला शिक्षा प्रदर्शन सूचकांक रिपोर्ट 2023 ने भी मानव संसाधन संकट की तस्वीर पेश की है। इसके मुताबिक अनपढ़ और कम शिक्षा वाले लोग नौकरी बाजार में आ रहे हैं। पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर देश में स्कूल न जाने वाले लगभग 26 मिलियन बच्चों को शिक्षित करने के लिए शिक्षा आपातकाल की घोषणा की थी।
यह है भारत की उल्लास योजना
भारत की उल्लास योजना का पूरा नाम अंडरस्टैंडिंग ऑफ लाइफलॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी (ULLAS) है। इसका उद्देश्य 15 साल के लोगों को साक्षर बनाना है। इसके तहत साक्षरता का अर्थ सिर्फ हस्ताक्षर करना आना ही नहीं बल्कि हजार तक गिनती, जोड़-घटा, गुणा, भाग जैसे सवालों के जवाब देने में सक्षम होना है।
इसके लिए ओपन बोर्ड की 150 अंकों की फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी असेसमेंट (एफ़एलनेट) परीक्षा पास करनी होती है। साक्षरता के बाद लाभार्थी को रोजगार के लिए वोकेशनल और स्किल ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, वाणिज्यिक कौशल, स्वास्थ्य देखभाल-जागरूकता, शिक्षा और परिवार कल्याण जैसे पहलू भी शामिल हैं। सरकार ने अगले छह साल में भारत को पूरी तरह से साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा है।