आर्थिक तंगी की मार झेल रहे पाकिस्तान ने अमेरिका को 60 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) की परियोजनाओं में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी परियोजना में पारदर्शिता न होने की वजह से ट्रंप सरकार इसे संदेह की नजर से देखती है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के वाणिज्य मामलों पर सलाहकार अब्दुल रज्जाक दाऊद ने बृहस्पतिवार को बताया कि ‘सरकार ने बुधवार को अमेरिकी के व्यापार मंत्री विल्बर रॉस के नेतृत्व में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के दौरान यह प्रस्ताव दिया।’
दिलचस्प बात यह है कि पिछले महीने अमेरिका के वरिष्ठ राजनयिक एलिस वेल्स ने कहा था कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गालियारा (सीपीईसी) में कोई पारदर्शिता नहीं है और विश्व बैंक द्वारा काली सूची में डाली गई फर्मों को इस परियोजना के तहत अनुबंध मिला है, जिससे पाकिस्तान का कर्ज बोझ बढ़ जाएगा।
दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के प्रधान उप सहायक विदेश मंत्री वेल्स ने यह टिप्पणी अपनी चार दिवसीय पाकिस्तान यात्रा के दौरान एक थिंक टैंक कार्यक्रम में बोलते हुए की थी। खान के वाणिज्य सलाहकार रज्जाक ने बताया कि अमेरिका ने (पाकिस्तान की) ऊर्जा, तेल और गैस, कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण में रुचि दिखाई है।