पाकिस्तान की एक अदालत ने 2008 मुंबई हमले मामले में अभियोजन पक्ष को और गवाह पेश करने के लिए सुनवाई अस्थायी रूप से रोक दी है। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की खबर के मुताबिक, इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने आतंकवाद रोधी अदालत में सुनवाई पर एक सप्ताह की रोक लगाते हुए अभियोजक को 19 में से कुछ गवाहों को गवाही के लिए समन जारी करने का निर्देश दिया। जस्टिस आमिर फारूक और जस्टिस मोहसिन अख्तर कियानी की खंडपीठ ने मंगलवार को संघीय जांच एजेंसी की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस कियानी ने कहा कि कई गवाह डर के कारण पेश नहीं हो रहे हैं, जबकि कुछ के ठिकानों का पता नहीं चल सका है। इस पर संघीय जांच एजेंसी की ओर से पेश हुए वकील अकरम कुरैशी ने पीठ को बताया कि कई गवाहों का पता लगा लिया गया है और वे अदालत में पेश होने को तैयार हैं। इसके बाद जस्टिस कियानी ने सभी को गवाही का समन जारी करने को कहा। जस्टिस फारूक ने ट्रायल कोर्ट में अगली सुनवाई के बारे में पूछा, तो कुरैशी ने पीठ को बताया कि आतंकवाद रोधी अदालत में बुधवार को सुनवाई होनी है। कुरैशी ने पीठ से सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की। कोर्ट ने कुरैशी का अनुरोध स्वीकार करते हुए एक सप्ताह के लिए सुनवाई पर रोक लगा दी।
दस साल बाद भी मामले में प्रगति नहीं
नवंबर 2008 में लश्कर ए तैयबा के दस आतंकियों ने कराची से नाव से मुंबई आकर सुनियोजित हमले किए थे, जिसमें 166 लोगों की मौत हुई थी और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। पाक की आतंकवाद रोधी अदालत में लश्कर के सात संदिग्धों के खिलाफ 10 साल से अधिक समय से चल रहे मुकदमे में ज्यादा प्रगति नहीं हो पाई है, क्योंकि पाकिस्तान उनके खिलाफ पर्याप्त सुबूत न होने का दावा करता है।
लखवी समेत सात संदिग्धों पर चल रहा है मामला
लश्कर ए तैयबा के जिन संदिग्धों पर मामला चल रहा है, उनमें जकिउर रहमान लखवी, अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हमाद अमीन सादिक, शाहिद जामिल रियाज, जामिल अहमद और यूनिस अंजुम शामिल हैं। इन सभी पर मुंबई हमले की साजिश रचने और उसे अंजाम देने, हत्या और हत्या की कोशिश के आरोप हैं। लखवी को छोड़कर बाकी सभी रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अदिला जेल में बंद हैं।