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SCO: साझा बौद्ध विरासत पर दिल्ली में हुए कार्यक्रम में एक मंच पर आए भारत, चीन और पाकिस्तान; कही ये बात

Tue, 14 Mar 2023 06:10 PM IST
कुमार विवेक वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

SCO: एससीओ के भारत के नेतृत्व में आयोजित होने वाले दो दिवसीय कार्यक्रम ने मध्य एशियाई, पूर्वी एशियाई, दक्षिण एशियाई और अरब देशों को एक साझा मंच पर लेकर लाया। इसका उद्देश्य अंतर-सांस्कृतिक संबंधों को फिर से स्थापित करना, मध्य एशिया की बौद्ध कला, कला शैलियों, पुरातात्विक स्थलों और प्राचीन सभ्यता के बीच समानताओं की तलाश करना है।
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शंघाई सहयोग संगठन - फोटो : PIB
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विस्तार
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शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के देशों के साथ भारत का सभ्यतागत जुड़ाव मंगलवार को नई दिल्ली में शुरू हुए "साझा बौद्ध विरासत" पर अपनी तरह के पहले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दिखा। इस दौरान पाकिस्तान और चीन सहित अन्य लोगों ने भी भाग लिया। 

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एससीओ के भारत के नेतृत्व में आयोजित होने वाले दो दिवसीय कार्यक्रम ने मध्य एशियाई, पूर्वी एशियाई, दक्षिण एशियाई और अरब देशों को एक साझा मंच पर लेकर लाया। इसका उद्देश्य अंतर-सांस्कृतिक संबंधों को फिर से स्थापित करना, मध्य एशिया की बौद्ध कला, कला शैलियों, पुरातात्विक स्थलों और प्राचीन सभ्यता के बीच समानताओं की तलाश करना है।

15 जून, 2001 को शंघाई में स्थापित अंतर-सरकारी संगठन SCO में वर्तमान में आठ सदस्य देश शामिल हैं - चीन, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, पाकिस्तान ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान, चार पर्यवेक्षक राज्य - अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया। इसके साथ ही छह "संवाद भागीदार" देश है जिनमें- आर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया, नेपाल, श्रीलंका और तुर्की शामिल हैं। एससीओ के आठ सदस्य देश विश्व की आबादी के करीब 42 प्रतिशत और वैश्विक जीडीपी के 25 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। 
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पाकिस्तान पर्यटन समन्वय बोर्ड के सलाहकार ए इमरान शौकत के अनुसार, सम्मेलन ने साझा बौद्ध विरासत वाले देशों को एक साथ लाने में भारत की भूमिका का एक स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। शौकत ने कहा, 'यह सत्र एससीओ के सभी देशों को एक साथ लाने में भारत की शानदार भूमिका का एक बहुत ही स्पष्ट उदाहरण है।

शौकत जो पहले पाकिस्तान के पुरातत्व और पर्यटन मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं, ने कहा, "मैं इस बात से बहुत प्रभावित हूं कि भारत कितना मेहमाननवाज रहा है, वे सभी देशों को कैसे एक साथ ला रहे हैं। भारत की हमेशा एक बड़ी भूमिका रहेगी, क्योंकि आप जानते हैं, बुद्ध का जन्म भारत में हुआ था, बौद्ध धर्म की उत्पत्ति यहीं से हुई थी। उन्होंने कहा कि वे भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों की साझा बौद्ध विरासत को संरक्षित करने, बढ़ावा देने के लिए सामूहिक रूप से काम करने के लिए तत्पर हैं।

उन्होंने कहा, "यह बौद्ध सभ्यता, अगर हम इसे देखना चाहते हैं, तो वास्तव में  सभी देशों और संस्कृतियों को एक साथ लाता है। इतिहास में वापस जाने और मतभेदों को भूलने और वापस जाना इसलिए बहुत अच्छा होगा बहुत अच्छा होगा कि हम सभी तब कैसे जुड़े हुए थे और हम अपनी सभी विभिन्न संस्कृतियों के बीच मतभेदों के बजाय समानताओं को कैसे साझा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें यह याद रखना चाहिए कि एक समय में हम एक ही संस्कृति थे और हम एक ही लोग थे।"

पाकिस्तान पर्यटन समन्वय बोर्ड के सलाहकार ने कहा कि पाकिस्तान बौद्ध पक्ष पर भी अधिक से अधिक काम करना शुरू कर रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान संस्कृति, सभी विरासतों, हिंदू, सिख और बौद्ध को संरक्षित और बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है।

चीन के दुनहुआंग रिसर्च एकेडमी के शोधकर्ता और सम्मेलन में भाग लेने वाले शेंगलियांग झाओ ने कहा कि इस कार्यक्रम ने भारत और चीन को इतिहास का जश्न मनाने का एक बड़ा अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा, 'यही बात भारत और चीन को एक-दूसरे के अधिक करीब लाती है। "झाओ ने अपनी टिप्पणी में कहा, "इस बार का सम्मेलन सांस्कृतिक रूप भारत और चीन के एक साथ आने का एक बड़ा संदेश देता है और वह है शांति। हम इस शांतिपूर्ण विरासत के साथ आगे बढ़ेंगे।" 

दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी और संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की उपस्थिति में दिल्ली के विज्ञान भवन में किया। सम्मेलन में मध्य एशियाई, पूर्वी एशियाई, दक्षिण एशियाई और अरब देश एक "साझा बौद्ध विरासत" पर चर्चा करने के लिए एक साझा मंच आए हैं।

चीन के दुनहुआंग रिसर्च एकेडमी, किर्गिस्तान के इंस्टीट्यूट ऑफ हिस्ट्री, आर्कियोलॉजी एंड एथनोलोजी, रूस के स्टेट म्यूजियम ऑफ द हिस्ट्री ऑफ रिलीजन, ताजिकिस्तान के नेशनल म्यूजियम ऑफ एंटीक्विटीज, बेलारूसी स्टेट यूनिवर्सिटी और म्यांमार के इंटरनेशनल थेरवाद बौद्ध मिशनरी यूनिवर्सिटी आदि के 15 से अधिक विद्वान और प्रतिनिधि 2 दिवसीय कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।

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