चीन सरकार में हुए बड़े फेरबदल के बाद यहां इस बात पर कयास लगाए जा रहे हैं कि चीन के नए अधिकारियों का नेपाल के प्रति क्या रुख होगा। खास नजर चीन के नए विदेश मंत्री चिन गांग के नजरिए पर है। हाल में विदेश मंत्री बने 56 वर्षीय चिन ने सात मार्च को पहली बार अंतरराष्ट्रीय मीडिया को संबोधित किया। चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के सत्र के मौके पर उन्होंने यह प्रेस कांफ्रेंस की। इसमें चीनी दार्शनिक कंफ्यूशियस के एक कथन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा- ‘दया के बदले व्यक्ति को दया दिखानी चाहिए और विरोध का जवाब न्याय से देना चाहिए। अगर विरोध के बदले भी दया दिखाई जाए, तो फिर दया के बदले क्या दिया जाएगा? चीन की कूटनीति में सद्भावना और उदारता की कोई कमी नहीं है।’
अखबार काठमांडू पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल के कूटनीति विशेषज्ञ अपने देश के संदर्भ में इस कथन का मतलब समझने की कोशिश कर रहे हैं। यहां कूटनीति विशेषज्ञों की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीसरे कार्यकाल में अपनाई जाने वाली नीतियों पर भी खास निगाह है। शी के पहले दो कार्यकाल के दौरान नेपाल के साथ चीन का रिश्ता सहज रहा। 2015 में चीन में आए भूकंप के दौरान चीन ने उदारता से मदद दी। जब नेपाल ने भारत के कहने पर नए संविधान पर अमल नहीं टाला और भारत ने घेराबंदी कर दी, तब भी चीन ने नेपाल की पूरी मदद की। शी के पहले कार्यकाल के दौरान नेपाल चीन की महत्त्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना में शामिल हुआ था।
हाल में चीन ने कहा है कि वह नेपाल की संप्रभुता और राष्ट्रीय गरिमा का पूरा सम्मान करता है। साथ ही वह अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के मुताबिक अपने विकास का रास्ता चुनने के नेपाल के अधिकार का समर्थन करता है। बदले में नेपाल ने वन चाइना पॉलिसी का समर्थन किया है, जिसका मतलब ताइवान को चीन का हिस्सा मानना है।
बीजिंग स्थित रेनमिन यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय के प्रोफेसर वांग पेंग ने काठमांडू पोस्ट से कहा- चीन की नेपाल नीति में तुरंत किसी बदलाव की संभावना नहीं है। वांग ने कहा कि चीन अपनी नीतियों में निरंतरता रखता है, इसलिए विदेश मंत्री बदलने के बावजूद नेपाल के प्रति पुराने नजरिये में फिलहाल कोई बदलाव नहीं आएगा।
चीन में पूर्व विदेश मंत्री वांग यी का अब दर्जा बढ़ा दिया गया है। उन्हें यांग जिची की जगह फॉरेन अफेयर्स कमीशन का निदेशक बना दिया गया है। इस तरह वे चीन सर्वोच्च कूटनीतिक (डिप्लोमैट) बन गए हैं और अब विदेश नीति तय करने में उनकी हैसियत राष्ट्रपति शी के ठीक बाद हो गई है।
चीन की शान्शी नॉर्मल यूनिवर्सिटी में मार्क्सवाद एवं समकालीन चीन विषय के प्रोफेसर वांग दोंगहोंग ने कहा- हर विदेश मंत्री का अपना स्टाइल होता है। लेकिन आखिरकार सभी देश की विदेश नीति के मुताबिक कार्य करते हैं। वांग को नेपाल विशेषज्ञ समझा जाता है। उन्होंने कहा- नेपाल की राजनीतिक स्थिति और बाहरी पहलुओं का असर नेपाल-चीन के विशेष कूटनीतिक व्यवहारों पर पड़ सकता है, लेकिन पुरानी नीति मोटे तौर पर जारी रहेगी।