रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना व अन्य।
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' लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ने से पाकिस्तान परेशान'
उन्होंने आगे कहा कि अनुच्छेद 370 के खत्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ने से पाकिस्तान परेशान है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कैसे भारत पाकिस्तान के साथ तीन नदियों का पानी साझा करता है, फिर भी उसे बदले में घुसपैठ, ड्रग्स और आतंकवाद मिलता है। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान कहता है कि हमने उसका पानी रोक दिया है। हमने उन्हें अपनी नदियों का 80% पानी दिया है और बदले में पाकिस्तान ने हमें घुसपैठ, आतंकवाद, ड्रग्स दिए हैं। पाकिस्तान को इस बात से परेशानी है कि लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी बढ़ी, कश्मीर दुनिया का एक शांतिपूर्ण क्षेत्र बन गया, लोगों ने मतदान करना शुरू कर दिया, पर्यटन, बुनियादी ढांचे में उछाल आया और अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद महिलाओं को उनके अधिकार मिले।'
'पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करने की साजिश रच रहा'
भाजपा सांसद ने कहा कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर समेत पूरे देश को अस्थिर करने की साजिश रच रहा है। वह लोकतंत्र को खत्म करना चाहता है। इसलिए वे अशांति पैदा करना चाहते हैं। पिछले 30 वर्षों में 4000 से अधिक लोग मारे गए। कितने बच्चे अनाथ हो गए, कई लोग चले गए, खासकर कश्मीरी पंडित। वे हमारी ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा थे।'
रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना व अन्य।
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एमजे अकबर ने कही यह बात
पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने कहा कि पहलगाम और अन्य स्थानों पर आतंकवादी हमला फासीवाद और जातीय संहार का आतंक था। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पाकिस्तान का जन्म हिंसा में हुआ था, न कि किसी राजनीतिक आंदोलन से।
ब्रिटेन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'पहलगाम और कई अन्य स्थानों पर हमने जो आतंक देखा है, यह कोई सामान्य रूप नहीं है। यह फासीवाद का आतंक है। यह जातीय संहार करने का आतंक है। आप यूरोप में हैं। अगर यूरोप फासीवाद को याद नहीं रखता, तो कौन सा महाद्वीप फासीवाद को याद रखेगा? आपके यहां ऐसी पीढ़ियां हैं जो हिटलर के युग को याद करती हैं। यह उस युग की वापसी है और हम इसे अपनी आंखों से देख रहे हैं, लेकिन जब तक हम इसे स्वयं नहीं समझेंगे और दूसरों को नहीं समझाएंगे, हम उन लोगों को निराश करेंगे, जिन्होंने अपनी जान दी। हम सभी ने पाकिस्तान की आतंकवाद के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख किया है, लेकिन यह विचारधारा क्या है और इसकी शुरुआत कहां से होती है? मैं संक्षिप्त रहूंगा, क्योंकि मेरे सहयोगियों ने पहले ही जो कहना था, वह कह दिया है और बहुत ऊर्जा के साथ। लेकिन संक्षेप में मैं आपको बता दूं कि पाकिस्तान का जन्म हिंसा में हुआ था। यह किसी लोकप्रिय आंदोलन के जरिए पैदा नहीं हुआ था। यह 1946 के कलकत्ता नरसंहार के बाद पैदा हुआ था और 1971 में ढाका नरसंहार के बाद इसकी मृत्यु हो गई। इसके बावजूद यह अपनी प्रतिबद्धता और हिंसा की नीति से पीछे नहीं हटा है, क्योंकि शासक वर्ग और उसके अभिजात वर्ग के लिए यह आनुवंशिक हो गया है।'
एमजे अकबर ने कहा, 'महात्मा गांधी के बारे में कई गलत धारणाएं हैं। हां, वे पिछले 2000 वर्षों में अहिंसा के सबसे बड़े दूत थे, लेकिन वे 22 अक्तूबर (1947) को जीवित थे, जब आधुनिक आतंकवाद का इतिहास तब शुरू हुआ, जब पाकिस्तान ने कश्मीर में सीमा पार से 5 हजार आतंकवादियों को भेजा। गांधी जी उस समय हमारे बीच ही थे। ठीक सात दिन बाद, 29 अक्तूबर को उनकी मुलाकात माउंटबेटन से हुई और माउंटबेटन हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि अहिंसा की मूरत वाला यह आदमी आज चर्चिल की तरह लग रहा है। यह कुछ ऐसा है, जिसे अंग्रेज समझेंगे और इसीलिए मैंने इस कहानी का उल्लेख किया। वह चर्चिल की तरह लग रहे हैं, क्योंकि गांधीजी ने कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ हम अहिंसा नहीं चाहते हैं। राज्य को खड़ा होना चाहिए। भारतीय सेना और हर सैनिक तैयार है। कोई भी भारतीय सैनिक पीछे नहीं हटेगा। वे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान दे देंगे, लेकिन कभी पीछे नहीं हटेंगे।' उन्होंने कहा कि हमारा संदेश बहुत स्पष्ट है कि हम कभी पीछे नहीं हटेंगे और उस संकल्प और एकता में भारत अपना भविष्य खोजेगा।'