सार
Pakistan Accused of Election Rigging: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में चुनाव के दूसरे चरण में शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन ने बड़ी बढ़त हासिल कर ली है। लेकिन मतदान के दौरान हिंसा, एक व्यक्ति की मौत और धांधली के आरोपों ने चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए। भारत पहले ही इन चुनावों को अवैध बता चुका है। ऐसे में क्या पाकिस्तान पीओके में चुनाव के जरिए अपने कब्जे को वैध दिखाने की कोशिश कर रहा है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
सवालों के घेरे में पीओजेके के चुनाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के नतीजों के बाद शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। पार्टी ने 18 में से 14 सीटों पर जीत दर्ज की है। हालांकि पूरे चुनाव के दौरान हिंसा, धांधली के आरोप और सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने मतदान की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत पहले ही साफ कर चुका है कि पीओजेके उसका अभिन्न हिस्सा है और वहां कराया जा रहा चुनाव पाकिस्तान के अवैध कब्जे को छिपाने की कोशिश है।
दो चरणों के चुनाव के बाद पीएमएल-एन के खाते में कुल 23 सीटें आ चुकी हैं, जो 45 निर्वाचित सीटों वाली तथाकथित विधानसभा में बहुमत के लिए पर्याप्त हैं। तीसरा चरण 10 अगस्त को होना बाकी है, लेकिन मौजूदा नतीजों के आधार पर पार्टी की सरकार बनना लगभग तय माना जा रहा है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को दूसरे चरण में केवल चार सीटें मिली हैं। वहीं इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने चुनाव का बहिष्कार किया है।
क्या चुनाव निष्पक्ष रहे या धांधली के आरोप लगे?
दूसरे चरण के मतदान के दौरान कई इलाकों में हिंसा हुई। एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली हुई और नतीजे पहले से तय थे। पार्टी के नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग के सामने सबूत रखने के बावजूद शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर पीएमएल-एन ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। चुनाव के दौरान कई स्थानों पर भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही।
भारत ने इन चुनावों पर क्या कहा है?
भारत लगातार कहता आया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं तथा पाकिस्तान ने इनके कुछ हिस्सों पर अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है। भारत ने पीओजेके में कराए जा रहे चुनावों को पाकिस्तान की ओर से अपने अवैध कब्जे को वैध दिखाने की कोशिश बताया है। भारत का कहना है कि ऐसी चुनावी कवायद से न तो जमीन की वास्तविक स्थिति बदलेगी और न ही पाकिस्तान के अवैध कब्जे को कोई वैधता मिलेगी।
क्या पीओजेके में पहले से ही हालात तनावपूर्ण थे?
चुनाव से पहले पीओजेके में कई सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन और हिंसा देखने को मिली। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी ने 12 विवादित शरणार्थी सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन चलाया था। संगठन का आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल सत्ता अपने पसंद के नेताओं को सत्ता दिलाने के लिए करती है। बाद में इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया और सुरक्षा बलों ने सख्त कार्रवाई की। ऐसे माहौल में हुए चुनावों पर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं, जिससे पाकिस्तान की चुनावी प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में आ गई है।