पाकिस्तान की संघीय शहबाज शरीफ सरकार ने सिंध सरकार के साथ विवादित नहर परियोजना पर बातचीत शुरू करने का फैसला लिया है, जो दक्षिणी सिंध में अशांति का कारण बन सकती है। एक वरिष्ठ प्रांतीय मंत्री ने रविवार को यह जानकारी दी।
सिंध में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) का लगातार तीसरा कार्यकाल है और केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा भी है। यह सिंध नदी से नई नहरों के निर्माण के खिलाफ विरोध का नेतृत्व कर रही है। सिंध सरकार को चिंता है कि चोलिस्तान नहर जैसी परियोजनाएं सिंध के पानी को दक्षिण पंजाब में भूमि सिंचाई के लिए मोड़ सकती हैं, जिससे सिंध में पानी की कमी और भी बढ़ जाएगी।
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रविवार को सिंध के वरिष्ठ मंत्री शरजील मोमेन ने पुष्टि की कि संघीय सरकार ने इस मुद्दे को बातचीत के जरिए हल करने के लिए बैठने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के सलाहकार और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) की पंजाब इकाई के अध्यक्ष राणा सनाउल्लाह ने उनसे संपर्क किया था, ताकि इस प्रक्रिया की शुरुआत की जा सके।
प्रदर्शनकारियों ने मंत्री पर किया हमला
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक हिंदू राज्य मंत्री पर रविवार को प्रदर्शनकारियों ने हमला किया। ये प्रदर्शनकारी पाकिस्तान सरकार की विवादास्पद सिंचाई नहर परियोजनाओं का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि इन परियोजनाओं के कारण नदियों के प्रवाह में कमी आएगी, जो दक्षिणी पाकिस्तान में सिंचाई के लिए बहुत जरूरी हैं।
इस बीच, पुलिस ने सिंध तरक्की पसंद पार्टी के नेता सैयद जलाल शाह को गिरफ्तार किया है, जो कोहिस्तानी के काफिले पर हमले में शामिल थे। इस मामले में पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं का नाम भी प्राथमिकी में दर्ज किया गया है।
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शरीफ ने कोहिस्तानी पर हमले की कड़ी निंदा की और घटना की पूरी जांच का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, जनप्रतिनिधियों पर हमला अस्वीकार्य है। इस घटना में शामिल लोगों को कड़ी सजा दी जाएगी। कोहिस्तानी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के सदस्य हैं और प्रदर्शनकारी उनकी पार्टी की संघीय सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।
सूचना मंत्री अत्ता तरार ने भी इस घटना का संज्ञान लिया और इसे हमला करार दिया। उन्होंने सिंध पुलिस के पुलिस महानिदेशक गुलाम नबी मेमन से घटना की जानकारी मांगी और केंद्रीय गृह सचिव से रिपोर्ट भी तलब की। सिंध के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह ने इस कृत्य की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।