भारत के खिलाफ दुष्प्रचार और कश्मीर राग अलापना पाकिस्तानी हुक्मरानों का स्थायी शौक रहा है, लेकिन अब उन्हें इन मुद्दों को उछालने पर पहले की तरह तवज्जो नहीं मिलती है। गाहे-बगाहे पाकिस्तान के नेताओं का दर्द इस बात को लेकर छलकता रहता है कि भारत के खिलाफ खासतौर पर कश्मीर के मुद्दे पर उनके लिए अब समर्थन जुटाना मुश्किल होता जा रहा है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने माना है कि भारत की जबरदस्त कूटनीति के चलते उनका देश संयुक्त राष्ट्र के मुख्य एजेंडे में कश्मीर का मुद्दा शामिल नहीं करा पा रहा है। भुट्टो ने कहा, कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के मुख्य एजेंडे में शामिल कराना अब खड़े पहाड़ पर चढ़ने जैसा मुश्किल काम हो गया है। भारत का नाम लेते हुए भुट्टो की जुबान लड़खड़ाने लगी थी। अटकते हुए उन्होंने भारत को पहले दोस्त बोलने की कोशिश की, लेकिन दोस्त नहीं बोल पाए और पड़ोसी देश कहकर संबोधित किया।
असल में पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सहित हर मंच पर कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है। शुक्रवार को भी उन्होंने यही कोशिक की थी। मौका था इस्लामोफोबिया डे की शुरुआत का, लेकिन भुट्टो ने कश्मीर का राग अलापना शुरू कर दिया। इसे लेकर किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई तो उन्हें शर्मिंदगी होने लगी। एजेंसी
गिलगित-बाल्टिस्तान में सैकड़ों लोगों की हत्या
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मानवाधिकारों का उल्लंघन आम बात है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तानी बलों सैकड़ों आम लोगों की हत्याएं की हैं। यूरोपीय संघ व स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों का कहना है, चीन के नेतृत्व में पाकिस्तान इस इलाके में लोगों का योजनाबद्ध नरसंहार कर रहा है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों को हासिल किया जा सके।
तब सिर्फ तुर्किये का समर्थन मिला था
भारत ने 2019 में संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा भी खत्म कर दिया, जिसके बाद से पाकिस्तान लगातार यह दावा कर रहा है क भारत कश्मीर में मुस्लिमों का दमन कर रहा है। इसी दावे के आधार पर 2019 में पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा में भारत के खिलाफ मतदान के लिए प्रस्ताव रखा था, लेकिन 193 देशों में से सिर्फ तुर्किये का समर्थन मिला था।
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भारत कश्मीर को विवादित नहीं मानता
संयुक्त राष्ट्र कार्यालय से बाहर बिलावल ने कहा, भारत के कूटनीतिक दबाव से कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र के मुख्य एजेंडे से गायब हो गया है। पाकिस्तान को इसे एजेंडे में शामिल कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता है। उन्होंने कहा, भारत अक्सर दावा करता है कि कश्मीर को लेकर सीमा विवाद नहीं है।