इस शोध के सह लेखक रिचर्ड ओ’शोघनेसी के मुताबिक, कोई ब्लैक होल जैसे ही एक्रीशन डिस्क में समाता है, तो वह गोलाकार घूमना शुरू कर देता है। यह ब्लैक होल घूमते हुए बड़े ब्लैक होल से टकराकर उसमें समा जाता है। यह प्रक्रिया ‘पैक-मैन’ वीडियो गेम सरीखे तरीके से लगातार चलती रहती है और बड़ा ब्लैक होल छोटे को निगलकर अपना आकार बढ़ाता चला जाता है।
रिचर्ड का मानना है कि उनकी यह अवधारणा इस बात को स्पष्ट करती है कि किसी आकाशगंगा का केंद्र किस तरह बढ़ता है, जिससे यह समझने में भी मदद मिलती है कि किस तरह आकाशगंगा का आकार बढ़ता है। उनका कहना है कि इससे अंतरिक्ष में अधिकांश संरचनाओं की व्याख्या करने में मदद मिलेगी।