फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ईरान पर दबाव बढ़ाने की नई चाल?: खाड़ी देश ऐसे ले रहे मिसाइल हमले का बदला, तेल उत्पादन पर लिया ये बड़ा फैसला

Sun, 01 Mar 2026 07:00 PM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अबू धाबी

सार

OPEC+ Hikes Oil Production: ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देशों ने बड़ा आर्थिक कदम उठाते हुए तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। ओपेक प्लस का यह निर्णय वैश्विक बाजार को स्थिर रखने की कोशिश माना जा रहा है। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा बना रहा तो तेल कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है।
विज्ञापन
ओपेक का बड़ा फैसला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम एशिया में ईरान और इस्राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। ईरान के मिसाइल हमलों और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच खाड़ी देशों ने बड़ा आर्थिक कदम उठाते हुए तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। इसे ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के साथ-साथ ईरान पर अप्रत्यक्ष दबाव की रणनीति माना जा रहा है।

विज्ञापन


तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला क्यों लिया गया?
ओपेक प्लस समूह के प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने उम्मीद से ज्यादा उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है। गठबंधन के आठ देशों के समूह ने अप्रैल से रोजाना 2.06 लाख बैरल अतिरिक्त तेल उत्पादन करने पर सहमति जताई है। इस समूह में सऊदी अरब, रूस और कई खाड़ी देश शामिल हैं, जो हाल के ईरानी मिसाइल हमलों से सीधे प्रभावित क्षेत्र में आते हैं।

ये भी पढ़ें- खामेनेई की मौत पर भड़का रूस: पुतिन ने जताई संवेदना, ईरानी राष्ट्रपति को भेजे शोक संदेश में क्या कहा?
विज्ञापन


क्या ईरान युद्ध का असर तेल बाजार पर दिख रहा है?
हालांकि आधिकारिक बयान में सीधे युद्ध का जिक्र नहीं किया गया, लेकिन फैसले का समय बेहद अहम माना जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद ईरान ने पश्चिम एशिया के कई इलाकों में जवाबी कार्रवाई की थी। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन बढ़ाकर तेल कीमतों में अचानक उछाल रोकने की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञों की चेतावनी क्या कहती है?
उत्पादन बढ़ोतरी बाजार को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त नहीं भी हो सकती है। आशंका जताई जा रही है कि यदि तनाव और बढ़ा तो तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं। खास चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। किसी भी सैन्य खतरे से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

ये भी पढ़ें- Iran-Israel War: ओमान के तेल टैंकर पर ईरान का हमला, चपेट में आए 15 भारतीय; दुबई से हाइफा तक हमलों की दहशत

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों बना सबसे बड़ा जोखिम?
ईरान जवाबी रणनीति के तहत इस अहम समुद्री मार्ग को निशाना बना सकता है। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। अगर यहां बाधा आई तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल संकट पैदा हो सकता है। यही वजह है कि खाड़ी देश पहले से उत्पादन बढ़ाकर संभावित झटके को कम करने की तैयारी कर रहे हैं।

क्या यह आर्थिक जवाबी हमला माना जा रहा है?
माना जा रहा है कि यह फैसला सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। तेल उत्पादन बढ़ाकर खाड़ी देश बाजार पर नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं ताकि युद्ध के कारण ऊर्जा संकट न बढ़े। इससे ईरान की संभावित ऊर्जा रणनीति भी कमजोर पड़ सकती है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- ईरान के दिल पर हमला: खामेनेई और उनके ठिकाने को कैसे बनाया गया निशाना? IDF ने जारी किया हमले का वीडियो

अप्रैल से लागू होगा नया उत्पादन स्तर
ओपेक प्लस समूह ने साफ किया है कि नया उत्पादन समायोजन अप्रैल महीने से लागू किया जाएगा। पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि उत्पादन बढ़ोतरी करीब 1.37 लाख बैरल प्रतिदिन होगी, लेकिन वास्तविक फैसला इससे काफी ज्यादा निकला।

इससे संकेत मिलता है कि सदस्य देश बाजार में अनिश्चितता को लेकर गंभीर हैं। अब वैश्विक बाजार की नजर सोमवार से शुरू होने वाले तेल कारोबार पर टिकी है। यदि तनाव जारी रहता है तो कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव संभव है।

अन्य वीडियो-

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें