नेपाल के प्रमुख विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल- यूनाइटेड मार्क्सवादी लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) के चल रहे राष्ट्रीय अधिवेशन से ये साफ संकेत उभरा है कि पार्टी ने अगले आम चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। तीन दिन का ये अधिवेशन शुक्रवार को शुरू हुआ। रविवार को पार्टी के नए पदाधिकारियों के चुनाव के साथ यह पूरा होगा। इस अधिवेशन के दौरान पार्टी अपना राजनीतिक प्रस्ताव पारित करेगी। अधिवेशन की कार्यवाही बंद कमरों में चल रही है।
ओली के हाथ से प्रधानमंत्री की कुर्सी जाने के चार महीनों के बाद यूएमएल का ये अधिवेशन हो रहा है। इस पर पूरे देश की नजर है। इसकी वजह यह है कि यूएमएल अभी भी देश की सबसे मजबूत राजनीतिक पार्टी है। अगले चुनाव में यह एक अहम दावेदार रहेगी। 2017 के चुनाव में यूएमएल ने सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था। तब यूएमल सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। माओवादी पार्टी के साथ मिल कर उसने पूर्ण बहुमत हासिल किया था। 2018 में इन दोनों ने आपस में विलय कर लिया।
लेकिन दोनों गुटों के नेताओं के बीच टकराव पैदा हो जाने के कारण ओली प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। पुष्प कमल दहल के नेतृत्व वाला माओवादी गुट इस साल यूएमएल से अलग हो गया। अभी वह नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व में बनी सरकार में शामिल है। दहल गुट के यूएमएल से निकलने के कुछ समय बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल भी यूएमएल से अलग हो गए। उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक अपने राष्ट्रीय अधिवेशन से ओली यह संदेश देने की कोशिश में हैं कि इस साल हुए विभाजनों से उनकी पार्टी कमजोर नहीं हुई है। देश में संसदीय चुनाव में लगभग साल भर का समय ही बाकी है। यूएमएल का दावा है कि उसके बाद फिर उसकी ही सरकार बनेगी। ओली ने शुक्रवार को दावा किया कि अधिक से अधिक लोग यूएमएल में शामिल हो रहे हैं। अब तक हजारों लोग पार्टी की सदस्यता ले चुके हैं।