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कोरोना वायरस: यूरोप से अमेरिका तक ओमिक्रॉन वैरिएंट ने ढाया है बच्चों पर कहर

Wed, 12 Jan 2022 07:56 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

विशेषज्ञों के मुताबिक रिसर्च से सामने आया है कि ओमिक्रॉन की वजह से सांस नली के ऊपरी हिस्से में समस्या पैदा हो सकती है। छोटे बच्चों में ये समस्या ज्यादा गंभीर रूप से सकती है। इसकी वजह से वे ब्रोंकाइटिस का शिकार हो सकते हैं...
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अमेरिका में कोरोना संक्रमित बच्चे - फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
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कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट ने बच्चों पर बहुत खराब असर डाला है। ब्रिटेन, यूरोप के कई दूसरे देशों, और अमेरिका में इस वैरिएंट के कारण संक्रमण इतनी तेजी से फैल रहा है कि स्कूलों को खुला रखना मुश्किल हो गया है। जबकि 2021 में इन देशों में स्कूलों को आम तौर पर खुला रखा गया था।

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मीडिया रिपोर्टों में इस बात की लगातार आलोचना हो रही है कि कोरोना महामारी के दो साल के तजुर्बे के बावजूद सरकारों ने बच्चों को इसके प्रभाव से बचाने की रणनीति नहीं बनाई। महामारी की ताजा लहर के बीच स्कूल खुले रखने के फैसले की भी कड़ी आलोचना हुई है। इसी निर्णय का नतीजा है कि अमेरिका में कई जगहों पर शिक्षकों ने संक्रमण से बचाव के लिए बर्फीले मौसम के बावजूद कक्षाओं की खिड़कियां खुली रखीं।

अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक ताजा लहर में जितनी बड़ी संख्या में बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। जो बाइडन प्रशासन ने दावा किया है कि स्कूलों में पढ़ाई जारी रखने के मकसद से उन्हें अब अधिक सक्षम बना दिया गया है। लेकिन बहुत सी जगहों पर स्कूल बोर्ड्स ने सावधानी बरतना बेहतर समझा है। कई जगहों पर शिक्षक यूनियनों ने स्कूल खुला रखने का विरोध किया। इस कारण शिकागो और इलनोइस आदि जैसे राज्यों में स्कूल एक हफ्ते के लिए बंद कर दिए गए हैं।

एक लाख बच्चे लॉन्ग कोविड का शिकार

ब्रिटेन, इटली और ऑस्ट्रेलिया में बीते साल स्कूल खुले रहे। इसके बावजूद बच्चे मोटे तौर पर कोरोना वायरस संक्रमण से बचे रहे। लेकिन ओमिक्रॉन वैरिएंट के फैलने के बाद विशेषज्ञों ने अंदेशा जताया है कि स्कूल संक्रमण फैलने का हॉटस्पॉट बन सकते हैँ। विशषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण की वजह से बच्चों के गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका अपेक्षाकृत कम रहती है। इसके बावजूद बीते दो वर्ष में बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हुए हैं। ब्रिटेन के ऑफिस ऑफ नेशनल स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक इस समय ब्रिटेन में एक लाख 17 हजार से ज्यादा बच्चे लॉन्ग कोविड का शिकार हैं।

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विशेषज्ञों के मुताबिक शुरुआती दौर पर यही दिखा है कि ओमिक्रोन के कारण हलके लक्षण उभर रहे हैं। इसके बावजूद कई रिसर्च से सामने आया है कि ओमिक्रॉन की वजह से सांस नली के ऊपरी हिस्से में समस्या पैदा हो सकती है। छोटे बच्चों में ये समस्या ज्यादा गंभीर रूप से सकती है। इसकी वजह से वे ब्रोंकाइटिस का शिकार हो सकते हैं।

बच्चों के लिए गंभीर स्थिति

अमेरिका में टेक्सस चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल के सह निदेशक डॉ. पीटर होटेज ने पिछले हफ्ते कहा था- ये बात सही नहीं है कि ओमिक्रॉन से सभी में हल्के लक्षण ही उभरते हैँ। अगर हम सभी पहलुओं को एक साथ रख कर देखें, तो इसकी वजह से अमेरिका में- खास कर बच्चों के लिए बहुत ही गंभीर स्थिति पैदा हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया को कोरोना महामारी के दो साल से तजुर्बे से सीख लेनी चाहिए। ये सीख यह है कि टीकाकरण, क्लास रूम में मास्क पहनना, नियमित जांच, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, बबल सिस्टम, क्लासरूम को अधिक हवादार बनाना और शक होते ही किसी छात्र को आइसोलेशन डालना ही वे उपाय हैं, जिनसे स्कूलों को सुरक्षित बनाया जा सकता है।

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