कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट ने बच्चों पर बहुत खराब असर डाला है। ब्रिटेन, यूरोप के कई दूसरे देशों, और अमेरिका में इस वैरिएंट के कारण संक्रमण इतनी तेजी से फैल रहा है कि स्कूलों को खुला रखना मुश्किल हो गया है। जबकि 2021 में इन देशों में स्कूलों को आम तौर पर खुला रखा गया था।
ब्रिटेन, इटली और ऑस्ट्रेलिया में बीते साल स्कूल खुले रहे। इसके बावजूद बच्चे मोटे तौर पर कोरोना वायरस संक्रमण से बचे रहे। लेकिन ओमिक्रॉन वैरिएंट के फैलने के बाद विशेषज्ञों ने अंदेशा जताया है कि स्कूल संक्रमण फैलने का हॉटस्पॉट बन सकते हैँ। विशषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण की वजह से बच्चों के गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका अपेक्षाकृत कम रहती है। इसके बावजूद बीते दो वर्ष में बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हुए हैं। ब्रिटेन के ऑफिस ऑफ नेशनल स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक इस समय ब्रिटेन में एक लाख 17 हजार से ज्यादा बच्चे लॉन्ग कोविड का शिकार हैं।
अमेरिका में टेक्सस चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल के सह निदेशक डॉ. पीटर होटेज ने पिछले हफ्ते कहा था- ये बात सही नहीं है कि ओमिक्रॉन से सभी में हल्के लक्षण ही उभरते हैँ। अगर हम सभी पहलुओं को एक साथ रख कर देखें, तो इसकी वजह से अमेरिका में- खास कर बच्चों के लिए बहुत ही गंभीर स्थिति पैदा हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया को कोरोना महामारी के दो साल से तजुर्बे से सीख लेनी चाहिए। ये सीख यह है कि टीकाकरण, क्लास रूम में मास्क पहनना, नियमित जांच, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, बबल सिस्टम, क्लासरूम को अधिक हवादार बनाना और शक होते ही किसी छात्र को आइसोलेशन डालना ही वे उपाय हैं, जिनसे स्कूलों को सुरक्षित बनाया जा सकता है।