तालिबान द्वारा अफगान और दुनिया के लोगों को अपने बारे में आधिकारिक संदेश देने वाली वेबसाइटें अचानक इंटरनेट से गायब हो गईं हैं। हालांकि अभी तक ऐसा होने के पीछे की वजह का पता नहीं चल पाया है। इसे तालिबान की ऑनलाइन माध्यम से लोगों तक पहुंच को रोकने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
अभी स्पष्ट नहीं है कि पश्तो, उर्दू, अरबी, अंग्रेजी और डारी भाषा वाली वेबसाइटें ऑफलाइन क्यों हो गई हैं। इन वेबसाइटों को सैन फ्रांसिस्को की एक कंपनी क्लाउडफायर से सुरक्षा मिली हुई थी। यह कंपनी वेबसाइट को विषय-वस्तु प्रदान करने और इसे साइबर हमलों से बचाने में मदद करती है।
‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ के मुताबिक, ऑनलाइन चरमपंथी सामग्रियों पर नजर रखने वाले एसआईटीई खुफिया समूह की निदेशक रीता काट्ज ने कहा कि व्हाट्सएप ने तालिबान से संबंधित कई समूहों को भी हटा दिया है। इससे पहले व्हाट्सएप की मूल कंपनी फेसबुक ने भी तालिबान से संबंधित खाते अफगानिस्तान पर उसके कब्जे के बाद मंगलवार को हटा दिए थे। हालांकि व्हाट्सएप के प्रवक्ता डेनियल मिस्टर ने व्हाट्सएप समूहों को हटाने की पुष्टि नहीं की है। ट्विटर ने तालिबान के खाते नहीं हटाए हैं।