अमेरिका के पूर्व ऊर्जा सचिव और नोबेल पुरस्कार विजेता स्टीवन चू ने कहा है कि परमाणु ऊर्जा भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता का आधार बन सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि भूराजनीतिक तनाव वैश्विक ईंधन बाजार की कमजोरियों को उजागर कर रहे हैं। चू ने भारत के साथ स्वच्छ ऊर्जा सहयोग बढ़ाने में अमेरिकी ऊर्जा नीति का नेतृत्व किया था। स्टीवन चू ने भारत के साथ क्लीन एनर्जी सहयोग बढ़ाने के समय अमेरिकी एनर्जी पॉलिसी का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत रहे हैं और सतत व टिकाऊ लक्ष्यों पर केंद्रित रहे हैं।
भविष्य में दुनिया को आगे ले जाने में भारत जैसे देशों अहम
उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस को एक इंटरव्यू में बताया, 'जब मैं ऊर्जा सचिव था, तो भारत में अपने समकक्षों के साथ मेरे बहुत करीबी और अच्छे संबंध थे। वे उन दिनों सस्टेनेबिलिटी, जलवायु परिवर्तन, इन सभी चीजों को लेकर बहुत गंभीर थे।' 'मुझे उम्मीद है कि भारत इन आदर्शों के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। शायद अमेरिका में थोड़ी रुकावट आई है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि हम इस प्रतिबद्धता पर वापस लौटेंगे।' चू ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए बड़ी अर्थव्यवस्था को मिलकर काम करना होगा और कहा, 'भविष्य में दुनिया को आगे ले जाने में भारत, चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) जैसे बड़े देशों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। ये देश मिलकर ही दुनिया की दिशा तय करेंगे।'
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भविष्य में सहयोग के क्षेत्र पर, उन्होंने न्यूक्लियर एनर्जी और नई रिएक्टर टेक्नोलॉजी की ओर इशारा किया और कहा, 'मुझे लगता है कि भारत ब्रीडर रिएक्टर डेवलप कर रहा है, जो बहुत बढ़िया है। ये फास्ट टर्म रिएक्टर हैं जो कन्वेंशनल सिजन रिएक्टर के लिए बहुत सारा फ्यूल जलाने में मदद करते हैं।' उन्होंने हाल के झगड़ों को घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई जरूरत से जोड़ा और कहा, 'मुझे लगता है कि हाल के युद्धों (यूक्रेन और ईरान) ने एनर्जी सिक्योरिटी, सीमाओं के अंदर एनर्जी एक्सेस को इसका बहुत जरूरी हिस्सा बना दिया है।'
भारत को लेकर क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा कि न्यूक्लियर पावर स्टेबल सप्लाई सुनिश्चित करने में साफ फायदा देती है। उन्होंने कहा, 'मैं न्यूक्लियर को वहां देखता हूं जहां अपने देश के भीतर ही ईंधन डालकर सीमित स्थान में ऊर्जा उत्पादन किया जा सकता है। इससे लंबे समय तक ऊर्जा मिलती रहती है। इसके विपरीत, प्राकृतिक गैस की उपलब्धता आमतौर पर हफ्तों या अधिकतम कुछ महीनों तक ही मापी जाती है।' यह पूछे जाने पर कि क्या न्यूक्लियर एनर्जी भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद कर सकती है, चू ने कहा, 'हां, जब तक वे यह पता लगा लें कि बजट में, समय पर रिएक्टर कैसे बनाए जाएं।'
डिस्पोजल एक हल होने वाली समस्या
उन्होंने एफिशिएंसी के उदाहरण के तौर पर रिएक्टर बनाने के लिए चीन के तरीके का जिक्र किया और कहा, 'चीन ने यह पता लगा लिया है। उनके पास दो दर्जन रिएक्टर हैं जो बजट में, समय पर हैं और वे सीखने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। वे रिएक्टर एक से दो, तीन से चार बनाने के लिए एक ही क्रू का इस्तेमाल करते हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'दुनिया को इस उदाहरण को फॉलो करना चाहिए। मैं बहुत उत्साहित हूं। मैं फैसले का बहुत बड़ा फैन हूं।' चू ने न्यूक्लियर वेस्ट के डिस्पोजल को लेकर चिंताओं पर भी बात की और कहा कि इसे तकनीकी नवाचार से मैनेज किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'डिस्पोजल एक हल होने वाली समस्या है।'
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उन्होंने नई तकनीक के बारे में बताया जिन पर काम किया जा रहा है और कहा, 'मैं एक समूह का सलाहकार हूं जो उन तकनीकों को देखने की कोशिश कर रहा है, जिनका इस्तेमाल ऑयल ड्रिलिंग में एक किलोमीटर नीचे बोरहोल ड्रिल करने के लिए किया जाता है और फिर साइड में न्यूक्लियर डिस्पोजल को बिना किसी मानव के कनस्तरों में जमा करने के लिए किया जाता है।' उन्होंने कहा कि ऐसे तरीकों से लागत कम हो सकती है और स्टोरेज के विकल्प बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, 'इसमें और भी कई जियोलॉजिकल साइट्स उपलब्ध कराने की क्षमता है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि इसकी लागत कम होगी।'
न्यूक्लियर को एक नया रूप से देखने में दिलचस्पी
उन्होंने आगे कहा, 'मानवयुक्त और मानवरहित अंतरिक्ष उड़ानों के बीच अंतर बहुत बड़ा होता है। यह लगभग दिन और रात जैसा फर्क है। यदि बिना सुरंगों और वेंटिलेशन शाफ्ट बनाए संसाधनों को जमा करना संभव हो सके, तो यह एक बड़ी उपलब्धि होगी।' चू ने कहा कि ये तरक्की न्यूक्लियर पावर को फिर से शुरू करने की बात को मजबूत करती है। उन्होंने कहा, 'मैं न्यूक्लियर को एक नया रूप देते हुए देखने में बहुत दिलचस्पी रखता हूं।'
भारत सबसे तेजी से बढ़ते बड़े एनर्जी कंज्यूमर्स में से एक है, जहां औद्योगिक विकास और शहरीकरण की वजह से डिमांड तेजी से बढ़ रही है। देश इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करने और लंबे समय के लिए ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए रिन्यूएबल और न्यूक्लियर पावर समेत अपने एनर्जी मिक्स को बढ़ा रहा है।