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अब श्रीलंका में अविश्वास प्रस्ताव : राष्ट्रपति राजपक्षे की कार्यकारी शक्तियां सवालों के घेरे में, आर्थिक बदहाली से लोग हलाकान

Sat, 09 Apr 2022 05:39 PM IST
सुरेंद्र जोशी एएनआई, कोलंबो

सार

श्रीलंका के मुख्य विपक्षी दल समागी जना बलवेग्या (SJB) ने शनिवार को एलान किया कि वह राष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। राजपक्षे गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही जनता को राहत देने में विफल रहे हैं। 
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no-confidence motion against Sri Lanka President Gotabaya Rajapaksa - फोटो : ANI
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विस्तार
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अविश्वास प्रस्ताव के कारण जहां पाकिस्तान में पीएम इमरान खान की सत्ता हिल गई है, वहीं भारत के एक अन्य पड़ोसी देश श्रीलंका में राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे सरकार के खिलाफ भी विपक्ष ने कमर कस ली है। वह अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। विपक्ष ने राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। 

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श्रीलंका के मुख्य विपक्षी दल समागी जना बलवेग्या (SJB) ने शनिवार को एलान किया कि वह राष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। राजपक्षे गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही जनता को राहत देने में विफल रहे हैं। श्रीलंका में विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा ने कहा कि हमने राष्ट्रपति राजपक्षे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है, क्योंकि वह देश को आर्थिक संकट से उबारने में विफल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि पर्याप्त शक्ति संतुलन के साथ संसद को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि राष्ट्रपति के तानाशाह बनने का कोई रास्ता न रहे। 

नई चुनाव प्रणाली पर जोर
उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों से प्रत्येक नेता ने कार्यकारी राष्ट्रपति पद को समाप्त करने का वादा किया, लेकिन केवल इसे मजबूत किया गया। प्रेमदासा ने मंगलवार को संसद में  जोरदार शब्दों में देश में नई चुनावी प्रणाली शुरू करने की जरूरत बताई। यहां यह उल्लेखनीय है कि 1978 में श्रीलंका में राष्ट्रपति प्रणाली की शुरुआत के बाद से हर चुनाव राष्ट्रपति पद को खत्म करने के वादे पर लड़ा गया था। हालांकि एक बार चुने जाने के बाद सभी राष्ट्रपतियों ने चुनावी वादे को नजरअंदाज किया। 
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देशभर में प्रदर्शन जारी
उधर, श्रीलंका के नागरिकों ने देश भर में मौजूदा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखा और राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को बर्खास्त करने की मांग उठाई। देश गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। खाद्य वस्तुओं व ईंधन की कमी के कारण देश की बड़ी आबादी संकट से जूझ रही है। श्रीलंका की अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी के बाद से गिरने लगी थी। सरकार के पास विदेशी मुद्रा की भारी कमी है, इस कारण वह खाने पीने की चीजें व तेल का आयात नहीं कर पा रही है। भारत समेत कई देशों ने मदद की है, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है। 

सोना बेचने को मजबूर लोग
आर्थिक संकट के चलते कोलंबो में लोग अपना सोना बेच रहे हैं। एक सोने की दुकान के मालिक ने बताया, “यहां के लोगों के पास खाने के लिए पैसे नहीं है इसलिए वह सोना बेच रहे हैं। लोग अपनी चीज़ों को गिरवी रख देते थे आज से पहले ऐसी स्थिति कभी नहीं आई।

श्रीलंका आईओसी एमडी ने दी प्रतिक्रिया
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की सहायक लंका आईओसी के प्रबंध निदेशक का कहना है कि नकारात्मक सोशल मीडिया ने श्रीलंका के पर्यटन क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। जबकि देश पहले से ही अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ एक साक्षात्कार में लंका आईओसी के एमडी मनोज गुप्ता ने कहा कि शिपमेंट ऑर्डर करने के लिए श्रीलंका को लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) खोलने के लिए 30-32 मिलियन अमरीकी डॉलर की आवश्यकता है और श्रीलंका में इस तरह के एलसी को खोलना बेहद मुश्किल काम है। उन्होंने कहा कि एक अकेला बैंक 32 मिलियन का इतना बड़ा एलसी नहीं खोल सकता है और इसके लिए हमें कम से कम चार से पांच बैंकों से संपर्क करने की आवश्यकता है। हम श्रीलंका के सेंट्रल बैंक और अन्य लाइसेंस प्राप्त वाणिज्यिक बैंकों के आभारी हैं, जिन्होंने हमें ईंधन शिपमेंट आयात करने के लिए एलसी खोलने में सक्षम बनाया है।

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